ग्वालियर। विशेष सत्र न्यायाधीश सुरेन्द्र कुमार श्रीवास्तव ने व्यापमं फर्जीवाड़े के आरोप में दो सगे भाइयों को पांच-पांच साल की सजा सुनाई है। छोटे भाई निहाल सिंह को एसएएफ की परीक्षा पास कराने के लिए बड़ा भाई राजकुमार सिंह परीक्षा में बैठा था। राजकुमार जब सॉल्वर बनकर आया था, उस वक्त वह पीटीएस तिघरा में आरक्षक पद पर पदस्थ था। फिजीकल टेस्ट के वक्त दोनों का फर्जीवाड़ा खुल गया और कंपू पुलिस ने दोनों के खिलाफ केस दर्ज किया।

व्यापमं ने 15 सितंबर 2013 को आरक्षक भर्ती परीक्षा का आयोजन किया गया था। निहाल सिंह निवासी धनोराकला जिला आगरा यूपी ने परीक्षा फार्म भरा था, लेकिन उसकी जगह उसका बड़ा भाई राजकुमार सिंह (आरक्षक पीटीएस तिघरा) परीक्षा देने पहुंचा। परीक्षा हॉल में कागजी कार्रवाई पूरी कर सॉल्वर के रूप में परीक्षा दे गया। इस कारण निहाल सिंह पास हो गया।

1 फरवरी 2014 को एसएएफ ग्राउंड पर फिजीकल किया जा रहा था। फिजीकल में निहाल सिंह पहुंचा। फार्म पर उसके हस्ताक्षर, फोटो का मिलान किया तो वह मैच नहीं किए। दस्तावेजों की जांच करने वाले अधिकारियों ने कमेटी को सूचना दी। कमेटी ने जब पूरे मामले की पड़ताल की तो निहाल सिंह का फर्जीवाड़ा सामने आ गया। कंपू थाने में केस दर्ज कराया।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर व्यापमं की जांच सीबीआई को हेंडओवर हो गई। सीबीआई ने अतिरिक्त जांच कर कोर्ट में रिपोर्ट पेश की। आरोपितों की ओर से बचाव में तर्क दिया कि वे नवयुवक हैं। पूर्व से कोई आपराधिक रिकार्ड नहीं है। इसलिए सजा देने में नरमी बरती जाए। सीबीआई को ओर से तर्क दिया गया कि दोनों आरोपितों ने आपराधिक षडयंत्र रचा था। इसलिए कड़ी सजा दी जाए। कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद निहाल सिंह व राजकुमार सिंह को 5-5 साल की सजा सुनाई है।

Posted By: Hemant Upadhyay