ग्वालियर(नईदुनिया प्रतिनिधि)। सेना भर्ती में अग्निपथ योजना के विरोध में ग्वालियर में उपद्रव कराने वाला फिजिकल ट्रेनर कोर्ट में हाजिर हो गया। पुलिस उसे तलाश कर रही थी, लेकिन वह पुलिस को चकमा दे रहा था। शनिवार को वह कोर्ट में हाजिर हो गया। यहीं पुलिस ने पूछताछ की, जिसमें उसने बताया कि वह फिजिकल ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट ही नहीं चलाता। उसे कोर्ट ने जेल भेज दिया है।

16 जून को ग्वालियर में सेना भर्ती में अग्निपथ याेजना के विरोध में उपद्रव हुआ था। गोला का मंदिर चौराहे से उपद्रव शुरू हुआ, फिर बिरलानगर रेलवे स्टेशन और मुख्य रेलवे स्टेशन पर उपद्रवियों ने जमकर तोड़फोड़ की। रेलवे ट्रैक पर पत्थर रखकर ट्रेन रोकीं, इसके बाद आगजनी भी की। इस दाैरान लाखाें की शासकीय संपत्ति काे भी नुकसान पहुंचाया गया था। इस मामले में पुलिस ने पांच एफआइआर दर्ज की। अलग-अलग वीडियो और फोटो की पड़ताल पुलिस ने की, इसमें सामने आया कि फिजिकल ट्रेनर मनोज परमार उर्फ मनोज फौजी करीब दो सौ युवकों को लेकर आया था। यहां से उसने इंटरनेट मीडिय लाइव वीडियो चलाकर भी लोगों को भड़काया। भड़काऊ टिप्पणियां भी की।

इसके चलते गोला का मंदिर पुलिस ने उस पर एफआइआर दर्ज की थी। उसकी गिरफ्तारी पर 5 हजार रुपये का इनाम घोषित किया, लेकिन वह पुलिस के हाथ नहीं आया। उसने शनिवार को न्यायिक मजिस्ट्रेट की कोर्ट में सरेंडर कर किया। कोर्ट ने उसे गोला का मंदिर थाना पुलिस को बुलाकर सुपुर्द किया। पुलिस ने उसे हिरासत में लेने के बाद पूछताछ की। उसने बताया कि वह फिजिकल ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट नहीं चलाता है। यह प्रमुख आरोपित है। उपद्रव के बाद से इसकी तलाश थी। मनोज परमार पर आरोप है कि 16 जून उसने युवाओं को अग्निपथ योजना के विरोध में भड़काया था, जिसके चलते शहर में बड़ा उपद्रव हो गया था। सार्वजनिक संपत्ति को बड़ा नुकसान पहुंचाया था। रेलवे स्टेशन पर भी तोड़फोड़ की गई थी।

Posted By: vikash.pandey

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