-कमांडेंट सेकंड बटालियन आइपीएस असित यादव के पत्र से खुलासा,दस फीसद मांगता था बाबू

-हेल्थ डायरेक्टर आफिस में जवानों के बिल रोके जाते थे, रीजनल डायरेक्टर हेल्थ को लिखा पत्र

Medical bills of SAF:ग्वालियर. नईदुनिया प्रतिनिधि। चार से पांच हजार रूपए में फर्जी मेडिकल सर्टिफिकेट और एमएलसी का मामला उजागर होने के बाद अब एसएएफ जवानों के साथ मेडिकल बिल के नाम पर रिश्वतखोरी सामने आई है। रीजनल हेल्थ डायरेक्टर के आफिस में एसएएफ जवानों के मेडिकल बिल इसलिए रोक लिए जाते हैं क्योंकि 10 फीसद रिश्वत नहीं मिलती थी। हर बिल पर पांच सौ रूपए की डिमांड की जा रही थी। यह मामला सेकंड बटालियन कमांडेंट असित यादव तक पहुंचा तो उन्होने रीजनल डायरेक्टर हेल्थ राकेश चतुर्वेदी को डीओ लेटर अर्दशासकीय पत्र लिख पीड़ा जताई। इसी पत्र के आधार पर बाबू उज्जवल श्रीवास्तव को कार्यमुक्त कर दिया गया। इसके अलावा तीन सदस्यीय जांच कमेटी का गठन किया गया है। इससे यह साफ है कि स्वास्थ्य महकमें में रिश्वतखोरी जमकर चल रही है।

यहां यह बता दें कि नईदुनिया ने स्टिंग आपरेशन कर इस बात का खुलासा किया था कि जिला अस्पताल, थाटीपुर डिस्पेंसरी और जयारोग्य अस्पताल के बाबू मिलकर फर्जी एमएलसी और मेडिकल सर्टिफिकेट चार से पांच हजार रूप्ए में बनाने को तैयार हैं। इस मामले में सीएमएचओ ने स्टिंग आपरेशन में फंसे डा एके सिंह को कार्यस्थल से हटाकर हाइकोर्ट डिस्पेंसरी में भेज दिया। जबकि जिला अस्पताल के ड्रेसर दिनेश गुप्ता, नर्सिंग स्टाफ, फार्मासिस्ट, कंप्युटर आपरेटर को मूल कार्यस्थल से अन्यत्र पदस्थ करने का आदेश सिविल सर्जन के नाम से लिखा था। लेकिन आठ दिन गुजरने के बाद भी सिविल सर्जन ने किसी भी कर्मचारी को मूल कार्यस्थल से हटाने की कार्रवाई नहीं की। अभी यह मामला शांत होता उससे पहले कमांडेंट के पत्र ने स्वास्थ्य महकमे में हलचल पैदा कर दी।

कमीशन नहीं तो बिल भी पास नहीं, सालों से अटकाए

दूसरी वाहनी के आरक्षक, उपनिरीक्षक स्तर के अधिकारी व कर्मचारियों ने मेडिकल बिल पास कराने के लिए आरडी आफिस में बिल भेजे थे। आरडी आफिस में बिल पास होने के बाद यह बिल वापस संबंधित विभाग को चले जाते हैं जहां से कर्मचारियों को इलाज पर होने वाला खर्च मिल जाता है। लेकिन आरडी आफिस में बिल पास कराने के नाम पर तैनात बाबू उज्ज्वल श्रीवास्तव इन कर्मचारियों से दस फीसद कमिशन की मांग कर रहा था। कमीशन न देने पर बिल राशि कम देता था या फिर बिल पास ही नहीं करता था। जिसके कारण कई सारे जवानों के बिल सालों से पास होने के लिए आरडी आफिस में पड़े हुए हैं। इसी बात को लेकर जब एसएएफ के जवानों ने कमांडेंट असित यादव के सामने अपनी परेशानी रखी। जिसको लेकर कमांडेंट ने अपने स्तर पर जांच कराते हुए रीजन डायरेक्टर हेल्थ को बाबू के खिलाफ डीओ लेटर लिखकर दिया और कार्रवाई की मांग की। हालांकि आरडी आफिस के बाबू उज्ज्वल श्रीवास्तव के खिलाफ पूर्व में भी कई शिकायतें इसी प्रकार की पाई गई थीं। जिसको लेकर उसे हटाया भी गया था लेकिन वापस वह फिर अपने पद पर लौटा आया था।

कथन

हमारे कर्मचारियों को परेशान किया जा रहा था। जिसको लेकर एक विभाग से दूसरे विभाग को पत्र लिखा गया है। जेडी आफिस में बाबू के खिलाफ क्या कार्रवाई की यह उन्हें ही पता होगा। मैं अभी बाहर हूं।

असित यादव, कमांडेंट सेकंड बटालियन,एसएएफ

आइपीएस द्वारा लिखा गया डीओ लेटर मिला था जिसके आधार पर बाबू को कार्यमुक्त कर दिया गया है। तीन सदस्य दल मामले की जांच कर रहा है। जांच रिपोर्ट मिलने के बाद निलंबन की कार्रवाई की जाएगी। फर्जी मेडिकल बनाने वालों को सिविल सर्जन तत्काल हटाएं नहीं तो जांच प्रभावित होगी ,मैं इसकी जानकारी लेता हूं कि सीएमएचओ के आदेश के बाद भी क्यों नहीं हटाया गया।

डा राकेश चतुर्वेदी,आरडी स्वास्थ्य सेवाएं ग्वालियर संभाग

Posted By: anil tomar

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