ग्वालियर। मंगलवार की शाम मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग ने एमपीपीएससी-2016 का फाइनल परिणाम घोषित किया। यह एग्जाम 225 पदों के लिए हुआ था और इसमें शहर के लगभग 150 स्टूडेंट शामिल हुए। इनमें सफलता कितनों को मिली है, इसका आंकड़ा परिणाम देरी से घोषित होने की वजह से सामने नहीं आ पाया। विशेषज्ञों का कहना है जो स्थिति निकलकर सामने आई है उससे लग रहा है, अब शहर के स्टूडेंट अपनी मेहनत की दम से प्रशासनिक पदों पर पकड़ बनाते जा रहे हैं।

गौर किया जाए तो इस एग्जाम का प्रीलिम्स मई में हुआ था और मेंस के लिए अक्टूबर 2016 का समय रखा गया। इसी क्रम में सफल स्टूडेंट्स के इंटरव्यू अक्टूबर के अंतिम सप्ताह से शुरू हुए थे। परिणाम में सफलता पाने वाले स्टूडेंट्स ने 'नईदुनिया के साथ तैयारी के समय आईं परेशानियों के बारे में जिक्र किया। उनका कहना है दिल में जुनून होना चाहिए मंजिल तो खुद-ब-खुद आकर कदम चूम लेती है। खास बात यह है इस परिणाम में दौलतगंज में रहने वालीं दिव्यांग मिनी ने भी सामान्य स्टूडेंट्स के साथ सफलता का परचम फहराया है। मिनी कहती हैं अब वे उन साथियों संपर्क करना चाहती हैं, जिन्हें किसी न किसी तरह शारीरिक समस्या है, लेकिन मन में आगे बढ़ने का हौसला है।

हौसलों के आगे बौनी हुईं अड़चनें

दौलतगंज में रहने वाली दिव्यांग मिनी की लंबाई भले ही ढाई फीट हो, लेकिन उनके हौसलों हमेशा ऊंचाई छूने के रहे। फिलहाल ये इंदौर में लेबर ऑफिसर पद की डिपार्टमेंटल ट्रेनिंग ले रही हैं, मगर इन्होंने इस बार के परिणाम में सहायक संचालक उद्योग व प्रबंधक का पद हासिल किया है। 2000 में इनके पैरों के चार मेजर ऑपरेशन हुए, इसके बाद 8 साल तक ये बेड पर ही रहीं। जैसे-तैसे 12वीं की लेकिन तीन साल के लिए फिर अक्षमता के इनकी राह में रोड़े अटकाए और ये आगे की पढ़ाई जारी न कर सकीं। 3 साल बाद बीकॉम में एडमिशन लिया और 2012 में पहला एमपीपीएससी दिया। चार बहनों में सबसे छोटी मिली अपनी सफलता का श्रेय अपने पिता हरि और मां शीला अग्रवाल को देती हैं।

पिता की तरह करेंगे प्रशासनिक सेवा

सुरेश नगर में रहने वाले शारिब कौसर फिलहाल अलीराजपुर में सहकारिता निरीक्षक के रूप में पदस्थ हैं। 2016 एमपीपीएससी में इन्हें मुख्य नगरपालिका अधिकारी की पोस्ट मिली है। शारिब की प्रेरणा इनके पिता सैय्यद शरीफ मोहम्मद बने, वे भिंड में सहायक जिला आबकारी अधिकारी के पद पर पदस्थ हैं। इनकी मां शबनम शरीफ ने भी इन्हें पढ़ाई से लेकर इंटरव्यू तक की तैयारी में मदद की है। शारिब का लक्ष्य डीएसपी या एसपी पद पाने का है।

ग्रामीण पृष्ठभूमि से निकलकर पाया ओहदा

अशोक कॉलोनी में रहने वाले महेंद्र गौतम को सहायक संचालक नगरीय विकास एवं पर्यावरण की पोस्ट मिली है। इन्हें 2015 एमपीपीएससी में उप पुलिस अधीक्षक की पोस्ट मिली थी, लेकिन किन्हीं कारण से इन्होंने डिपार्टमेंट ज्वॉइन नहीं किया। ग्रामीण पृष्ठभूमि से ताल्लुक रखने वाले महेंद्र अपनी सफलता का श्रेय शिवपुरी के शासकीय स्कूल में प्रधान अध्यापक पिता एवरण सिंह और मां सोमवती देवी को देते हैं। जिन्होंने शुरू से ही इन्हें जन साधारण की मदद करने की सीख दी है।

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