ग्वालियर, नईदुनिया प्रतिनिधि। खेरिया गांव (तिघरा) के पास जंगल में बेखौफ होकर मुरम का अवैध उत्खनन कर रहे माफियाओं ने शनिवार की आधी रात को पुलिस को देखकर ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी। छह से अधिक बदमाश पुलिस पर गोलियां चलाते हुए जेसीबी व ट्रैक्ट्रर-ट्राली लेकर जंगल में गायब हो गए। पुलिस का दावा है कि अवैध उत्खनन के मामले में पहाड़ी गांव निवासी पंकज महाना व उसके साथियों के नाम सामने आए हैं। पुलिस ने आरोपित को पकड़ने के लिए उसके गांव में रविवार की सुबह दबिश दी। पुलिस के आने से पहले आरोपित व उसके साथी गांव से गायब हो गए। गांव के लोगों ने बताया कि रात से ही पंकज गांव नहीं आया है।

तहसीलदार भूमिका सक्सेना को शनिवार की रात को सूचना मिली कि खेरिया गांव के पास जंगल में जेसीबी व ट्रैक्टर-ट्राली की मदद से मुरम खाेदकर ले जा रहे हैं। तहसीलदार ने अवैध उत्खनन की सूचना पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों को दी। तिघरा थाना पुलिस ने रात में ही खेरिया गांव के जंगल में पुलिस बल के साथ खनन माफियाओं को पकड़ने के लिए घेराबंदी की।

पुलिस को देखते ही फायरिंग कीः रात के अंधेरे में आधा दर्जन से अधिक लोग जेसीबी की मदद से मुरम खाेदकर ट्रैक्टर ट्राली में भरते हुए नजर आए। पहले से अलर्ट खनन माफियाओं ने पुलिस को आगे बढ़ने से रोकने के लिए ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी। गोलियां चलते ही पुलिस के जवानों के कदम ठिठक गए। फायरिंग की सूचना थाने भेजकर और पुलिस बल बुलाया। माफियाओं के गोलियां चलाने की सूचना मिलते ही आसपास के थानों का पुलिस बल भेजा गया।

जेसीबी व ट्रैक्टर ट्राली लेकर जंगल में भागेः अंधेरे में पुलिस फायरिंग करते हुए खनन माफिया जेसीबी व अपने ट्रैक्टर-ट्राली लेकर जंगल की तरफ भाग गए। पुलिस उत्खनन स्थल तक पहुंच गई। पुलिस ने थोड़ा सा उजाला होने पर आसपास के जंगल में माफिया व उनके वाहनों की तलाश की, लेकिन पुलिस को कुछ नही मिला। सुबह पुलिस अधिकारी भी मौके पर पहुंच गए। पड़ताल में पता चला है कि रात के अंधेरे में पहाड़ी गांव निवासी पंकज महाना व उनके साथी मुरम निकाल रहे थे। पुलिस ने खनन माफियाओं के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर उनकी तलाश शुरू कर दी है।

तिघरा क्षेत्र में पत्थर व मुरम माफिया सक्रियः तिघरा थाना क्षेत्र में पत्थर व मुरम माफिया सक्रिय है। यह लोग वन विभाग की टीम पर भी कई बार फायरिंग कर चुके हैं। जानकार सूत्रों ने बताया कि अवैध उत्खनन में उपयोग में आने वाले लाखों रुपये की कीमत के वाहनों को राजसात होने से बचाने के लिए फायरिंग करते हैं। यह लोग घेराबंदी होने पर वन विभाग के अमले व पुलिस पर सीधे फायरिंग करने से भी नही चूकते हैं।

Posted By: vikash.pandey

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