ग्वालियर। उत्तर भारत के राज्यों सहित ग्वालियर-चंबल संभाग से गुरुवार को मानसून विदा हो गया। पिछले 8 साल में मानसून सबसे अच्छा रहा है। इस बार औसत से 118.7 मिमी ज्यादा 908.7 मिमी बारिश दर्ज हुई। मौसम विभाग द्वारा की जा रही अल्प बारिश की भविष्यवाणी को भी गलत साबित कर दिया। बारिश के 102 दिनों में से सिर्फ 49 दिन शहर में पानी बरसा। 53 दिन सूखे निकले, लेकिन आखिरी में हुई बारिश ने जिले का पूरा सूखा खत्म कर दिया।

बंगाल की खाड़ी से नमी आना बंद हो गई है। इससे आसमान साफ हो गया है। दिन का तापमान 30 डिग्री सेल्सियस के ऊपर चल रहा है, लेकिन न्यूनतम तापमान में गिरवाट आ रही है। यह गिरावट हवा का रुख बदलने की वजह से आई है। मौसम विभाग ने गुरुवार से मानसून वापसी की घोषणा कर दी है। पहले दिन ग्वालियर-चंबल संभाग सहित राजस्थान, हरियाणा, दिल्ली, पंजाब, पश्चिमी उत्तर प्रदेश में मानसून जाने की औपचारिक घोषणा कर दी।

दिन में छाए बादल

गुरुवार को अधिकतम तापमान मे बढ़ोतरी होने की वजह से दिन में बादल छाए। साथ ही देर शाम तेज हवा चलने की संभावना भी बनी, लेकिन मौसम में बदलाव नहीं आ सका। अधिकतम तापमान 34.2 डिसे और न्यूनतम तापमान 19.4 डिसे रिकार्ड हुआ।

सीजन के तीन महीनों में ऐसा रहा मानसून

मानसून सीजन 1 जून से 30 सितंबर के बीच रहता है। शहर में मानसून 18 से 20 जून के बीच आता है। 20 जून से 30 सितंबर के बीच शहर में 102 मानसून सक्रिय रहता है। य सीजन खत्म होने के 10 दिन बाद भी मानसून सक्रिय रहा है। 10 अक्टूबर को मानसून की विदाई हुई है।

ऐसे समझें मानसून की वापसी

-दक्षिण व पूर्व दिशा से चलने वाली हवा अपने साथ नमी लेकर आती है। यह हवा बारिश कराती हैं, लेकिन 7 अक्टूबर के बाद से इस दिशा की हवा का चलना बंद हो गई है।

-उत्तर से पश्चिम दिशा की ओर हवा चलने लगी है। इससे दिन का तापमान बढ़ रहा है और रात के तापमान में गिरावट आने से ठंडक आने लगी है। उत्तर से आने वाली हवा अपने साथ हिमालय से ठंडक लेकर आती है।

-सुबह के वक्त ओस गिरने लगी है। जिससे मौसम में ठंडक आ गई है।

-ऊपरी हवा में नमी की मात्रा 50 फीसदी से नीचे आ गई है।

-रात में ठंड बढ़ने लगेगी। अक्टूबर में दिन के तापमान में धीरे-धीरे गिरावट आएगी।

ठंड अच्छी पड़ेगी

हवा का रुख उत्तर से पश्चिम की ओर होने के साथ मानसून विदा हो गया है। 2011 के बाद सबसे ज्यादा बारिश इस बार हुई है। ठंड भी अच्छी पड़ने की संभावना है।

-उमाशंकर चौकसे, मौसम वैज्ञानिक

Posted By: Saurabh Mishra

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