ग्वालियर। Morena Gajak सर्द मौसम में गजक का नाम सुनकर मुंह में पानी आ जाता है। जानकारों के अनुसार यह सर्दी के मौसम में काफी फायदेमंद भी है। यह स्वाद के मामले में जितनी बेजोड़ होती है, उतनी ही इसे बनाने में मेहनत लगती है। इसके इतिहास को लेकर माना जाता है सालों पहले चंबल नदी के पानी के कुछ घटकों से इसकी उत्पत्ति हुई। यही वजह है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 'मुरैना की गजक' नाम को लोकप्रियता मिली। व्यापारी अच्छी सेल पाने के लिए मुरैना या फिर ग्वालियर में होते हुए भी पैकेट को 'मुरैना की गजक' ही नाम देना चाहता है। इसके रूप कई हों, मगर गुडतिल गजक, तिल-रेवड़ी गजक और खस गजक मुख्य किस्में हैं। वर्तमान में इसे गोंड गजक, चॉकलेट, ड्राई फ्रूट गजक और बर्फी गजक का नाम मिल चुका है।

तेल निकलने तक कूटी जाती है तिल

गजक बनाने वालों का कहना है सर्वाधिक खरीदार की पहली पसंद गुड़ और तिल की गजक है। शकर की कम ही लेना पसंद करते हैं। क्योंकि गुड़ गर्मी करता है और सर्दी से राहत देता है। गुड़ और तिल से 5-8 किलोग्राम गजक तैयार करने के लिए लगभग 10 से 15 घंटे का समय लगता है। इसके आटे को तब तक हाथों से फेंटा जाता है, जब तक सभी तिल टूट न जाए और आटे में अपना तेल छोड़ दे। और भी तरीके की गजक बनाने विधि जानने पाठक गूगल पर भी पहुंच सकते हैं। देशभर में मुरैना की गजक सबसे ज्यादा पसंद की जाती है, मुरैना में इस्तेमाल होने वाली विधि से ही जब सभी जगह गजक बनाई जाने लगी है।

Posted By: Prashant Pandey