Morena News: मुरैना. नईदुनिया प्रतिनिधि। राजस्थान के करौली जिले में स्थित कैलादेवी मंदिर के लिए निकला शिवपुरी के 17 पदयात्रियों को दल मुरैना में चंबल नदी में बह गया। हादसा सबलगढ़ तहसील अंतर्गत टेंटरा थाना क्षेत्र में बरोठा घाट पर शनिवार की सुबह हुआ। गहराई में पहुंचने पर मची भगदड़ के बाद सात यात्री राजस्थान के करौली जिले की ओर तो तीन मुरैना की सबलगढ़ तहसील की ओर सुरक्षित पहुंच गए। दो लोगों को शव मिले हैं। पांच लापता हैं। मृतक जेठ-बहू के अलावा लापता लोग एक ही परिवार के हैं।

शिवपुरी जिले के तेंदुआ थाना क्षेत्र के चिलावत गांव के 17 ग्रामीण पांच दिन पहले राजस्थान के कैलादेवी मंदिर पर दर्शनों के लिए पदयात्रा करते हुए निकले थे। शनिवार सुबह सभी सबलगढ़ के टेंटरा थाना क्षेत्र के रायडी-राधेन गांव के बरोठा घाट पर पहुंचे। यहां से पदयात्री एक-दूसरे का हाथ पकड़कर चंबल नदी पार करने लगे। जैसे ही नदी के बीच में पहुंचे तो अचानक से पानी गहरा होने के कारण डूबने लगे। इससे मची भगदड़ के बाद सात लोग करौली की सीमा के घाट तो तीन श्रद्धालु सबलगढ़ की ओर आ गए। सात श्रद्धालु देवकीनंदन पुत्र हीरा कुशवाह, धनीराम पुत्र हीरा कुशवाह, रुकमणी पत्नी दीपक कुशवाह, लवकुश पुत्र धाम सिंह कुशवाह, कल्लो पत्नी श्याम कुशवाह, ब्रजमोहन पुत्र पप्पू कुशवाह, रश्मि पत्नी और सुनील कुशवाह बह गए। घटना के डेढ़ घंटे बाद कल्लो कुशवाह व उनके 60 वर्षीय जेठ देवकीनंदन का शव मिल गया।

35 किलोमीटर का फेरा बचाने के लिए जोखिम में डालते हैं जान

बताया जाता है कि श्योपुर व शिवपुरी के लोग हर साल शारदीय व चैत्रीय नवरात्र से पहले कैलादेवी की पदयात्रा शुरू कर देते हैं। यह पदयात्री लगभग 35 किमी का फेरा बचाने के लिए जान जोखिम में डालकर सीधे चंबल नदी पार कर राजस्थान के करौली जिले के ओर जाते हैं, जबकि करौली जाने के लिए सबलगढ़ के मांगरौल से नदी पार करने के लिए पांटून पुल बना है। यह पुल पार करने पर राजस्थान के मंडरायल, करौली, हिंडोन तिराहा होकर कैला देवी मंदिर तक की दूरी 65 किमी है जबकि नदी पर कर पदयात्री 30 किमी पैदल दूर ही कैलादेवी मंदिर पहुंच जाते है। शारदीय नवरात्र में यात्रियों की संख्या अधिक होने पर स्थानीय ग्रामीण नाव का संचालन करते हैं। गर्मी के दिनों में पानी कम होने पर लोगों का चंबल नदी पार करना आम बात है, परंतु जहां हादसा हुआ है वहां से करीब 20 फीट दूर गहराई कम है, परन्तु जानकारी के अभाव में सभी लोग हादसे की चपेट में आ गए। सबलगढ़ एसडीएम मेघा तिवारी ने बताया कि प्रशासन को जानकारी में नहीं था कि ग्रामीण इस तरह जान जोखिम में डालकर नदी पार कर रहे हैं, तो इनके लिए नाव का इंतजाम करवा देते।

Posted By: anil tomar

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