ग्वालियर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। महलगांव स्थित करौली माता कुंवर बाबा का मंदिर 105 वर्ष प्राचीन मंदिर हैं। करौली माता मंदिर के प्रति क्षेत्र के लोगों की श्रद्धा और मान्यता है। मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा महंत हीरालाल महाराज ने की थी। उनके उपरांत महंत ओमप्रकाश शर्मा ने यह दायित्व संभाला। वर्तमान में महंत दिलीप शर्मा पर मंदिर का दायित्व है। नवरात्र में नौ दिन तक यहां मेला जैसे महौल रहता है। आकर्षक बिजली सज्जा की जाती है।

मंदिर का इतिहास-

महंत दिलीप शर्मा के छोटे भाई संजय शर्मा ने मंदिर के इतिहास के संबंध में जानकारी देते हुये बताया कि यह मंदिर एक सदी पूर्व बिलौआ के हिडयले के जंगलों में था। उनके दादाजी महंत हीरालाल महाराज महलगांव की पहाड़ी पर बस गये। माता करौली व कुंवर बाबा की प्रति लोगों की श्रद्धा को देखते हुये सरकार शितौले साहब पुत्र की अभिलाष लेकर दरबार में आये थे। मां व कुंवर बाबा ने उन्हें पुत्र रत्नी की प्राप्ती का आशीर्वाद दिया। लगभग एक वर्ष बाद शितौले साहब ने दरबार में हाजिरी लगाते हुये बताया कि पुत्र नहीं पुत्री हुई है। तह महंतजी ने कहा कि घर जाकर देखो पुत्र ही हुआ है। वाकई उनके यहां पुत्र ने जन्म लिया था। वंशवृद्धि की अभिलाषा पूर्ण होने पर सरदार शितौले ने यहां तलाब खुदवाया, मंदिर के निर्माण के साथ बाउंड्रीवाल तालाब की खुदाई में से निकले पत्थर से कराई। और मंदिर को दानपेटे जमीन दी।

वार्षिक आयोजन के साथ नवरात्र पर मेला लगता है- मंदिर पर प्रतिदिन आरती भोग के अलावा वार्षिक आयोजनों में बसंत पंचमी श्रीमद भागवत कथा के समापन के साथ विशाल भंडारा होता है। और नवरात्र पर मेला जैसे माहौल रहता है।

Posted By: anil tomar

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