ग्वालियर। नईदुनिया प्रतिनिधि। ग्वालियर के फूलबाग मैदान में धार्मिक सद्भाव की अनोखी मिसाल देखने को मिली। अपनी आने वाली संतान के बेहतर भविष्य के लिए मां के आगे धर्म की दीवार भी आड़े नहीं आई। फूलबाग मैदान में रविवार को आयोजित हुए गर्भ संस्कार और 24 कुंडीय गायत्री महायज्ञ में दो मुस्लिम महिलाएं भी शामिल हुईं। गीता और गायत्री मंत्रों के बीच उन्हें हवन कुंड में आहुति डालते देखकर सभी चौंक गए। इस आयोजन में 500 गर्भवति महिलाएं पुंसवन (गर्भ) संस्कार में शामिल हुईं। करीब 2 हजार धर्मप्रेमियों ने हवन में आहुतियां दीं।

शहर के गुड़ीगुड़ा का नाका, खजांची बाबा की दरगाह निवासी रुखसार व डबरा निवासी खुशबू बानो हवन में शामिल हुईं। वह अपने गर्भस्थ शिशु को कुरान के साथ ही गीता व गायत्री मंत्रों से भी संस्कारित करने की सोच रखती हैं। खास बात यह है कि मां बनने की अद्भुत अनुभूति कर रहीं, इन दोनों ही महिलाओं के पति भी अलग सोच नहीं रखते हैं। रुखसार के पति आबिर खान व खुशबू के पति सादिक खान से जब नईदुनिया ने बातचीत की तो उन्होंने बेहिचक कहा कि, जो हमारे बच्चे के लिए बेहतर है। उस हर बात से हमें ऐतराज नहीं हैं, क्योंकि अच्छी बातें किसी भी धर्म से सीखने को मिलें, उन्हें सीखना चाहिए।

'बजरंगवली का भक्त, अदा करता हूं नमाज"

गायत्री परिवार द्वारा आयोजित पुंसवन संस्कार (गोद भराई) में शामिल हुईं खुशबू बानो के पति सादिक का कहना है कि, मैं हिंदुओं के साथ रहता हूं, लेकिन कभी असमानता का भावना नहीं आई। हम मंदिर जाते हैं, भंडारों में शामिल होते हैं और चंदा भी देते हैं। मैं खुद बंजरंगवली का भक्त हूं और नमाज भी पढ़ता हूं। 24 कुंडीय गायत्री महायज्ञ में जब अपनी पत्नी को लेकर आया, तो यहां हिंदू महिलाओं ने बड़े प्यार से अपने बीच में उसे बैठाया। यह कार्यक्रम मुख्य रूप से महिलाओं के लिए ही था, वरना मैं भी हवन में जरूर बैठना चाहता।

'गीता भी देती है कुरान जैसा सुकून"

रुखसार के पति आबिर खान का कहना है कि कुरान की आयतों के साथ ही अन्य धर्मों की अच्छी बातों को भी आत्मसात करना चाहिए। मोहल्ले की आंगनवाड़ी कार्यकर्ता ने जब बताया कि फूलबाग पर गोदभराई की रस्म होनी है, तो मैं खुद पत्नी को यज्ञ स्थल छोड़कर आया। मेरी गर्भवति पत्नी न केवल गायत्री महायज्ञ में शामिल हुई। बल्कि, विधि-विधान से पूजा-पाठ कर तिलक लगाया व कलावा भी पहना। यह मुझे भी बहुत अच्छा लगा। क्योंकि जितना सुकून हमें कुरान पढ़कर मिलता है, उतना ही सुकून गीता सुनकर भी मिलता है।

Posted By: Hemant Upadhyay