ग्वालियर. नईदुनिया प्रतिनिधि। कुछ लोगों ने इंटरनेट मीडिया पर उपलब्ध प्लेटफार्म को अपनी जिंदगी का हिस्सा बना लिया है। फेसबुक, वाट्सएप और इंस्टाग्राम पर मिले अनजानों के करीब भी वे पहुंच रहे हैं। उनसे घंटों बात कर रहे हैं और अपने मन की बात भी बता रहे हैं।

यह स्थिति ठीक नहीं है। फेसबुक, वाट्सएप और इंस्टा पर कुछ अनजानों ने अपना जाल बिछा रखा है, जो खतरनाक हैं। ये आपको ठग सकते हैं, घर पहुंचकर आपके अपनों को नुकसान भी पहुंचा सकते हैं। इसलिए जरूरी है, हम इसकी उपयोगिता को समझें। अपनी दोस्ती की लिस्ट में उन्हीं के नामों को शामिल करें, जिन्हें हम जानते हैं। अगर वे हमारी किसी बात पर कुछ कह भी देते हैं तो इसे समझाइश के रूप में लें। उनके विचार या कमेंट का बुरा नहीं मानें। हालांकि ऐसा कोई कर नहीं रहा है। फेसबुक और इंस्टा पर दोस्तों की सूची बढ़ाना ट्रेंड सा बन गया है। इस बुधवार को नईदुनिया में प्रकाशित इंटरनेट मीडिया पर बहस के संस्कार हमें इसी तरफ लेकर जाती है। कहानी की पात्र राखी को भाषण प्रतियोगिता में भाग लेना होता है। वह दिए गए टापिक से संबंधित एक पोस्ट फेसबुक की वाल पर डालती है, लेकिन यहां उसके सकारात्मक के साथ नकारात्मक जवाब मिले। इन कमेंट ने उसे मानसिक रूप से परेशान कर दिया। जिसका असर राखी की तैयारी पर पड़ा।़रिाखी जैसे उन यूजर्स की भी यही हालत रहती है, जो इंटरनेट मीडिया को सबकुछ मानते हैं। सोचते हैं किसी कार्य को पूरा करने से पहले उससे संबंधित राय अपने फेसबुक साथियों से जान लें, जबकि किसी भी विषय को लेकर हमें अपने अभिभावकों से चर्चा करनी चाहिए। अगर आपसे बड़ा कोई भाई या बहन है तो उनसे भी विमशर् कर सकते हैं। यहां आपको सटीक उत्तर मिलेगा। इंटरनेट मीडिया बहस करने या राय जानने का प्लेटफार्म नहीं है। उसकी मदद से हम देश-दुनिया में हो रहीं घटनाओं के बारे में जान सकते हैं, लेकिन मिलने वालीं सूचनाओं पर आख मूंदकर भरोसा करना गलत है। कुछ लोगों ने इंटरनेट मीडिया का दुरुपयोग करना शुरू कर दिया है। हर व्यक्ति हर बात सच नहीं लिख रहा है। इसलिए जब भी कुछ पढ़कर निर्णय लें, उससे पहले संबंधित विषय से जुड़े तथ्यों की पड़ताल कर लें। इंटरनेट मीडिया की बदौलत कुछ लोग ठगी का शिकार हो चुके हैं। आंकड़ा निकाला जाए तो अब सबसे ज्यादा वारदात इसी प्लेटफार्म की बदौलत हो रही हैं। बच्चे तो इससे दूर रहें, वे अनजान हैं। यहां नजर आने वाले प्रलोभन में आसानी से फंस सकते हैं। अभिभावकों को इस तरफ ध्यान देने की जरूरत है। अब समय सुरक्षा का नहीं रहा है। बढ़ती तकनीक ने खतरा भी बढ़ा दिया है। बच्चे मोबाइल पर क्या कर रहे हैं, क्या नहीं इसके बारे में अभिभावकों को जानना चाहिए। उनकी कालिंग हिस्ट्री को देखना चाहिए। उनके दोस्तों से मिलना चाहिए, नहीं तो वे किसी मुसीबत में फंस जाएंगे। इंटरनेट मीडिया के किसी प्लेटफार्म पर अगर उनके बच्चे हैं तो अभिभावक भी उनकी फ्रेंडलिस्ट में खुद को शामिल कराएं। इससे उनकी गतिविधियों पर आसानी से नजर रखी जा सकती है। बच्चों के असली शिक्षक अभिभावक हैं।

Posted By: anil tomar

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