Naidunia Sehat Shala : इंदौर/ग्वालियर (नईदुनिया रिपोर्टर)। प्राणायाम केवल श्वास लेने और छोड़ने का ही नाम नहीं है, बल्कि यह हमें सांस लेने, छोड़ने और उसे रोकने के सही तरीके के बारे में बताता है। प्राणायाम क्या है यह हमें समझना होगा। श्वास पर नियंत्रण लाना और सांसों को पूरी एकाग्रता से लेना-छोड़ना प्राणायाम है। श्वास की गहराई, गति, कितनी श्वास ले रहे हैं, कितनी छोड़ रहे हैं यह सब जानना प्राणायाम है। इसमें चार आयाम होते हैं, जिन्हें ध्यान में रखना चाहिए। ये आयाम हैं पूरक (श्वास लेना), रेचक (श्वास छोड़ना), आंतरिक कुंभक (श्वास लेकर उसे अंदर रोकना) और बाह्य कुंभक (श्वास छोड़कर उसे बाहर ही रोकना)। प्राणायाम के पूर्व इन चारों आयामों को हमें जानना चाहिए। यह बात योग विशेषज्ञ डॉ. हेमंत शर्मा ने मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में एक साथ आयोजित की जा रही नईदुनिया सेहत शाला में मंगलवार को कही।

प्राणायाम के ज्ञान से शुरू हुई सेहत शाला में डॉ. शर्मा ने बताया कि हमारे शरीर में पंच वायु होती है। प्राण वायु (हृदय के आसपास होती है), अपान वायु (नाभि से नीचे के भाग में), समान वायु (हृदय व नाभि के बीच), व्यान वायु (हाथ व पैर में) तथा उदान वायु (कंठ से मस्तिष्क तक)। यदि यह पंच वायु संतुलित मात्रा और संतुलित स्थिति में रहे तो हम स्वस्थ रहते हैं। प्राणायाम इनमें संतुलन लाता है। इसके अलावा उन्होंने कपालभाति तथा अनुलोम-विलोम भी किया। इसका सही तरीका बताते हुए उन्होंने कहा कि यह एक और दो के अनुपात में होना चाहिए। अर्थात्‌ जितना समय सांस लेने में लगता है उससे दोगुना समय सांस छोड़ने में लगना चाहिए। भ्रामरी प्राणायाम कराते हुए यह बताया गया कि इससे मस्तिष्क के सारे रसायन संतुलित होते हैं।

बढ़ती है रोग प्रतिरोधक क्षमता

डॉ. शर्मा ने आसनों की जानकारी, उनका अभ्यास और उसके लाभों से भी योगाभ्यासियों को अवगत कराया। इस दिन उष्ट्रासन, शशकासन और उत्तान मंडुकासन कराए गए। उष्ट्रासन करने के सही तरीके के साथ यह बताया कि यह थायराइड ग्रंथि के लिए उपयोगी होता है। इसके अलावा गले की चर्बी और गर्दन दर्द दूर करने में उपयोगी है। शशकासन में सिर को आगे की ओर झुकाया जाता है, जिससे रक्त संचार मस्तिष्क की ओर बढ़ता है। इससे मस्तिष्क के अच्छे हार्मोंस स्रावित होते हैं जो न केवल प्रसन्न रखते हैं, बल्कि रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ाते हैं। इस आसन से पाचनतंत्र बेहतर रहता है। उत्तान मंडुकासन का लाभ यह होता है कि यह फेफड़ों की क्षमता बढ़ाता है, गर्दन के पीछे की मांसपेशियों की अकड़न-जकड़न को दूर करने में मददगार होता है तथा जंघा की मांसपेशियों में खिंचाव देता है। इसके साथ ही यह निर्देश भी दिए कि डायबिटिक, हृदय रोगी या जिन्हें कोई गंभीर रोग है वे विशेषज्ञ के दिशा-निर्देशन में ही प्राणायाम करें।

कल यह बताएंगे

नईदुनिया सेहत शाला में योग विशेषज्ञ डॉ. हेमंत शर्मा गुरुवार को पेट के बल किए जाने वाले आसन कराएंगे। इसमें वे विपरीत नौकासन, सरल धनुरासन, धनुरासन आदि कराएंगे। इसके अलावा वे पंचकोश के सिद्धांत से भी परिचित कराएंगे।

सेहत शाला से ऐसे जुड़ें

इस विशेष निशुल्क ऑनलाइन शिविर में भाग लेने के लिए अपने फेसबुक प्रोफाइल पर Naidunia Sehat Shala का पेज सर्च करें और उसे लाइक को। प्रतिदिन सुबह 5.30 बजे से सेहत शाला में भाग लेने ब्राउजर में जाकर facebook.com/naiduniasehatshala टाइप करके भी सीधे पेज पर पहुंच सकते है।

Posted By: Nai Dunia News Network

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