ग्वालियर, Narendra Singh Tomar Special Interview। नरेंद्र मोदी मंत्रिमंडल के वरिष्ठ सदस्य, केंद्रीय कृषि मंत्री और मुरैना-श्योपुर सांसद नरेंद्र सिंह तोमर इन दिनों ग्वालियर चंबल में प्रचार की कमान संभाले हुए हैं। नईदुनिया ग्वालियर के संपादकीय प्रभारी वीरेंद्र तिवारी ने इस दौरान ज्योतिरादित्य सिंधिया, किसान बिल सहित विभिन्न मुद्दों पर तोमर से विशेष बात की। तोमर ने कहा कि व्यक्ति निर्माण की प्रक्रिया धीमी होती है इसलिए सिंधिया को भी भाजपा की रीति-नीति में ढलने में वक्त लगेगा। तोमर ने इसके अलावा सिंधिया का पार्टी में भविष्य का स्वरूप क्या होगा, सिंधिया गुट के कारण भाजपा में भविष्य में विद्रोह क्यों नहीं होगा, किसान बिल देश के लिए क्यों जरूरी है, क्या ब्राह्मण गुट को पार्टी में दरकिनार किया जा रहा है, जैसे सवालों पर भी बेबाकी से अपनी राय रखी। इस दौरान उन्होंने प्रदेश की जनता से वादाखिलाफी के लिए कांग्रेस पर भी जमकर निशाना साधा। पेश है बातचीत के अंश।

आपको नहीं लगता, भाजपा ने प्रदेश की जनता पर उपचुनाव थोपा है ?

- भाजपा पर यह आरोप आरोप निराधार है। कांग्रेस अपने घर को संभाल नहीं पाई, अपनी असफलता दूसरे के सिर मढ़ रही है।

भाजपा पर आरोप लगते हैं कि वह जनादेश का उल्लंघन करती है, चाहे मप्र हो या दूसरे राज्य ?

- नहीं, ऐसा नहीं है.. महाराष्ट्र, राजस्थान में हमारी सरकार थी लेकिन अब नहीं है । भाजपा लोकतंत्र में भरोसा करने वाली पार्टी है। मोदी जी के नेतृत्व के कारण अन्य दल भयभीत हैं, इसलिए मिथ्या आरोप लगाए जा रहे हैं।

कमल नाथ सरकार गिराने की पटकथा आपके बंगले पर लिखी गई फिर मुख्यमंत्री पद पर पहला हक भी आपका होना चाहिए था ?

- देखिए, चूंकि मैं दिल्ली में हूं और इस प्रदेश का हूं, इसलिए मेरी जनकारी में पूरा मामला था। चूंकि मेरा बंगला था इसलिए उपयोग किया गया। जहां तक मुख्यमंत्री बनने की बात है, मैंने कभी कुछ नहीं चाहा।

लेकिन आपके मन में नहीं आया कि सीएम पद की शपथ ले लें ?

- बिल्कुल नहीं, मैं वार्ड अध्यक्ष से लेकर अभी तक बिना लालच के पार्टी का कार्यकर्ता रहा, इसलिए मैंने ऐसा कुछ नहीं सोचा। मेरा नाम चल रहा था, इसकी मुझे जानकारी नहीं है।

जिस ढंग से आप लोग थोक में कांग्रेस के लोगों को भाजपा में ला रहे हैं उससे नहीं लगता कि पार्टी में ही विद्रोह का बीज बोया जा रहा है?

- भाजपा विचार आधारित पार्टी है, दूसरे लोग आएंगे इससे कोई भी पार्टी कार्यकर्ता न भयभीत है, न होगा। हम सभी मिलकर काम करेंगे इसलिए विद्रोह होगा, ऐसी कोई आशंका नहीं है।

कहा जा रहा था कि सिंधिया दूध में चीनी की तरह घुल जाएंगे, फिलहाल की स्थिति में तो ऐसा नहीं लग रहा है? वह अपनी अलग लाइन बना रहे हैं।

- दुनिया में सबसे कठिन काम व्यक्ति निर्माण की प्रक्रिया है। जब हम किसी को भाजपा में लाते हैं तो इस मनोयोग से लाते हैं कि वह भाजपा में समरस होगा। हम आशा कर रहे हैं कि ज्योतिरादित्य सिंधिया हो या कोई और, वह जल्द ही भाजपा में समरस होंगे।

लेकिन महाराज की छवि तो भाजपा की रीति-नीति नहीं है, भाजपा में तो भैया चलता है ?

- देखो! प्रक्रिया धीमी है। ऐसा थोड़ी है कि सेरिडान खिलाओ-सरदर्द दूर भगाओ, जैसी तेजी से सिंधिया भाजपामय हो जाएंगे।

लेकिन कहा जा रहा है कि चुनावी पोस्टर से सिंधिया का चेहरा ही गायब है, स्टार प्रचारकों की सूची में उनका नाम 10वें नंबर पर है?

- देखिए किसी के चेहरे पर चुनाव लड़ने की बात ही नहीं है। भाजपा नेतृत्व चुनाव लड़ता है । नेतृत्व में सिंधिया भी शामिल हैं।

कांग्रेस आरोप लगा रही है कि नरेंद्र सिंह तोमर, शिवराज सिंह भाजपा में ब्राह्मण नेताओं को आगे नहीं बढ़ने दे रहे हैं? चाहे नरोत्तम मिश्रा हों या गोपाल भार्गव ?

- कांग्रेस यह बताए कि जब उनकी सरकार थी तो उन्होंने कितने लोगों को आगे बढ़ाया, विकास के कौन से काम कराए, उनके पास बताने को कुछ नहीं है तो हमारी अंदरूनी मामलों में दखल दे रही है।

यदि सरकार बचा ले जाते हैं तो ऐसा क्या होगा, जो 17 साल में नहीं हुआ ?

- विकास एक निरंतर प्रक्रिया है। शिवराज सिंह चौहान संवेदनशील मुख्यमंत्री हैं और उम्मीद है कि वह जो कार्य कर रहे हैं उससे भी उम्दा ढंग से प्रदेश में विकास के कार्य करते रहेंगे।

कांग्रेस ने विधायकों का रेटकार्ड जारी किया कि 35 करोड़ प्रति विधायक दिया गया था ?

- मेरी जानकारी में नहीं है कि कोई लेनदेन हुआ था विधायकों को भाजपा में लाने को लेकर ।

क्या किसान बिल को ठीक से देश को समझा नहीं पाई पार्टी, इतना हंगामा क्यों मचा ?

- किसान बिल का परिणाम ठीक आने वाला है। लेकिन कांग्रेस के लोग जो काम अपने कार्यकाल में चाहते हुए भी नहीं कर पाए वह काम मोदी सरकार ने करके दिखा दिया तो उनके पेट में दर्द हो रहा है। जिन रिफार्म का कांग्रेस अपने घोषणा पत्र में जिक्र करती है वह जब हो जाता है तो विरोध करती है । यह हास्यास्पद स्थिति है।

खेती लाभ का धंधा नहीं बन पा रही है क्यों ?

- समग्र रूप से खेती के स्वरूप को बदलने की जरूरत है। लंबे कालखंड में खेती को लेकर सरकारों ने काम किया लेकिन यह सही है कि किसानों की स्थिति में सुधार की बहुत जरूरत है। मोदी जी के नेतृत्व में वह प्रयास हो रहा है जो खेती की नींव को स्थाई रूप से मजबूत करेगा। किसान महंगी फसलों की ओर जाए, किसान तकनीक से जुड़े, किसानों को फसल का सही मूल्य मिले इसकी बहुत जरूरत है। खाद और यूरिया को लेकर पहले बहुत अधिक दिक्कत थी लेकिन अब वह समस्या हट चुकी है। खेती में सरकार का निवेश तो पहुंचा लेकिन निजी निवेश नहीं पहुंचा । इस वजह से किसान जहां खड़ा था वहीं खड़ा है। अभी छोटे किसान तक निवेश पहुंचने के लिए दस हजार एमपीओ बना रहे हैं । संगठित होकर खेती करके वह सशक्त होगा, ब्याज में छूट मिलेगी। फिर जो गैप्स बचे हैं उसके लिए अलग से योजना है। कृषि के लिए 1 लाख करोड़ लगाएंगे। एमपीओ के माध्यम से यह पैसा रूट होगा जिससे निवेश छोटे गांव तक पहुंचेगा। किसानों के जीवन में क्रांतिकारी बदलाव दिखाई देगा।

चलिए अंतिम सवाल, चुनाव के कारण कोरोनो पर राजनीतिक दल जन स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं, कोर्ट भी फटकार लगा रहा है?

सभी दलों को कोरोना प्रोटोकाल का पालन करना चाहिए। स्वास्थ्य सर्वोपरी होना चाहिए। मैं आपके माध्यम से भी अपील करता हूं कि प्रत्येक राजनीतिक संगठन इसका विशेष ख्याल रखे। कोर्ट जो भी दिशा निर्देश दे रहा है उसका सभी को पालन करना चाहिए।

Posted By: Prashant Pandey

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