ग्वालियर, नईदुनिया प्रतिनिधि। नेफीस यानि नेशनल आटोमेटेड फिंगरप्रिंट आइडेंटिफिकेशन सिस्टम- जिसके जरिये एक क्लिक पर अपराधी की पूरी कुंडली उसके फिंगरप्रिंट के जरिये खोलने का दावा था। यह सिस्टम फिलहाल शोपीस बनकर रह गया है। वजह है- नेफीस जिस साफ्टवेयर के जरिये चल रहा था, उसका सर्वर ही बैठ गया है।

पिछले करीब दस दिन से ग्वालियर में यह सिस्टम ठप पड़ा है। न तो अपराध होने के बाद घटनास्थल से लिए गए चांस प्रिंट को मिलान के लिए इस पर अपलोड किया जा पा रहा है, न ही गिरफ्तार किए गए अपराधियों के फिंगरप्रिंट, फोटो अपलोड हो रहे हैं। यह वही सिस्टम है, जिसके जरिये मध्यप्रदेश में 62 मामलों में पुलिस को अपराधियों तक पहुंचने में सफलता मिली और ग्वालियर में 5 मामलों के आरोपितों तक पुलिस पहुंची। खास बात यह है- इस सिस्टम के जरिये ऐसे अपराधी भी पकड़े गए जो अपराध करने के बाद दूसरे राज्यों में छिप गए थे या फिर अपराध करने के लिए शहर में आए थे और रहने वाले दूसरे राज्य के थे। जिन तक पहुंचना भूसे में से सुई खोजने जैसा था, लेकिन इस सिस्टम के माध्यम से अपराधियों की पहचान हो गई और अपराधी पकड़े गए फिर सलाखों के पीछे पहुंचे। लेकिन सर्वर ठप हो जाने की वजह से यह सिस्टम बंद पड़ा है। ग्वालियर पुलिस की फिंगरप्रिंट शाखा के अधिकारियों के मुताबिक यह सिस्टम दिल्ली से ही सर्वर में गड़बड़ी है, जिसका सुधार कार्य नेशनल क्राइम रिकार्ड ब्यूरो द्वारा कराया जा रहा है। अभी ग्वालियर ही नहीं प्रदेश के दूसरे शहरों में भी यही स्थिति है। लेकिन इतने हाईटेक सिस्टम का इस तरह फेल होना पूरे सिस्टम पर ही सवाल खड़े कर रहा है।

क्या है नेफीस...

- नेशनल आटोमेटेड फिंगरप्रिंट आइडेंटिफिकेशन सिस्टम, इस साफ्टवेयर को इस तरह बनाया गया है कि इस सिस्टम पर सभी राज्यों की पुलिस कनेक्ट रहेगी। अभी 18 राज्य में यह सिस्टम चालू हुआ है। जैसे ही कोई अपराधी पकड़ा जाता है तो इस पर फिंगरप्रिंट अपलोड किए जाते हैं, अपराधी की फोटो, उसका नाम सहित पूरी जानकारी। जानकारी डालने के बाद 10 नंबर का एक विशिष्ट नंबर हर अपराधी का जनरेट होता है। इसके बाद जब कोई अपराध होता है तो पुलिस घटनास्थल से चांस प्रिंट उठाती है, चांस प्रिंट यानि अपराधी के फिंगरप्रिंट। इन्हें इस सिस्टम में फीड किया जाता है, अगर घटना करने वाले अपराधी का पहले से फिंगरप्रिंट इसमें अपलोड है तो सिस्टम सीधे अपराधी की कुंडली खोल देता है। चाहें अपराधी दूसरे राज्य का ही क्यों न हो, क्योंकि जहां यह सिस्टम चालू है, वहां का पूरा डाटा इस पर उपलब्ध है। इसके जरिये अपराधी की पहचान करना आसान है। अपराधी की पहचान हो जाती है और उस तक पुलिस पहुंच जाती है। नेशनल क्राइम रिकार्ड ब्यूरो द्वारा इसे फ्रांस की कंपनी द्वारा डिजाइन कराया गया है।

मध्यप्रदेश में 10 लाख से ज्यादा अपराधियों के फिंगरप्रिंट अपलोड: नेफीस पर मध्यप्रदेश में 10 लाख से ज्यादा अपराधियों के फिंगरप्रिंट अपलोड हो चुके हैं। पुराने अपराधियों के फिंगरप्रिंट अपलोड होने का काम भी चल रहा है, लेकिन अभी यह सिस्टम ही ठप हो गया। ग्वालियर के 60 हजार से ज्यादा अपराधियों के फिंगरप्रिंट व अन्य जानकारी अभी इस पर लोड हो चुकी है।

ग्वालियर के यह मामले...जिनमें नेफीस से पकड़े गए अपराधी:

1- थाटीपुर इलाके में चोरी की घटना हुई थी। घटनास्थल से चांस प्रिंट उठाए गए, इन्हें सिस्टम में अपलोड किया गया। आरोपित गुजरात में पकड़ा गया, वहां भी चोरी करता पकड़ा गया था। जब वह पकड़ा गया तो फिंगरप्रिंट गुजरात पुलिस ने लिए और सिस्टम पर अपलोड किए। सिस्टम पर अपलोड होते ही उसके फिंगरप्रिंट ग्वालियर में घटनास्थल से मिले चांस प्रिंट से मैच कर गए।

2- महाराजपुरा इलाके में ठेकेदार के घर 10 लाख रुपए के गहने चोरी हुए। घटनास्थल से चांस प्रिंट मिले और इसे फिंगरप्रिंट टीम ने सिस्टम में फीड किया तो यह चांस प्रिंट बिजौली के हिस्ट्रीशीटर के फिंगरप्रिंट से मैच कर गए। उसी हिस्ट्रीशीटर को पुलिस ने पकड़ लिया, जब पकड़ा गया तो उसने जीजा व अन्य साथियों के साथ मिलकर कई चोरी की वारदात स्वीकार कीं।

वर्जन:

नेफीस सर्वर की गड़बड़ी के चलते करीब दस दिन से बंद है। इस संबंध में वरिष्ठ अधिकारियों से चर्चा की है। सोमवार से यह दोबारा शुरू होने की संभावना है। दिल्ली से ही सर्वर पर सुधार कार्य चल रहा है।

जीएस तिवारी, प्रभारी, फिंगरप्रिंट शाखा, ग्वालियर पुलिस

Posted By: anil tomar

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