Navratri 2021: विजय सिंह राठाैर, ग्वालियर नईदुनिया। शक्ति की आराधना का पर्व, शारदीय नवरात्र का शुक्रवार को समापन हुआ। 9 दिन पूरे होने पर दशहरे पर मां की प्रतिमाओं का विसर्जन किया गया। शुक्रवार को विसर्जन से पूर्व दुर्गा प्रतिमा का गंध, चावल, फूल, आदि से पूजा हुई, जिसके पश्चात दुर्गा की प्रतिमाओं का विसर्जन हुआ और ज्वारों का भी विसर्जन किया गया।

ज्योतिषाचार्य सुनील चोपड़ा ने बताया कि इससे नौ दिनों तक जवारों में व्याप्त शक्ति हमारे भीतर प्रवेश करती है।

हमारी सनातन परंपरा में विसर्जन का विशेष महत्व है। विसर्जन अर्थात पूर्णता फिर चाहे वह जीवन की हो, साधना की हो या प्रकृति की। जिस दिन कोई वस्तु पूर्ण हो जाती है, तो उसका विसर्जन जरूरी हो जाता है। आध्यात्मिक जगत में विसर्जन समाप्ति की निशानी नहीं, अपितु पूर्णता का संकेत है। नवरात्र के ये 9 दिन इसी बात की ओर संकेत हैं कि हमें अपनी साधना में किसी एक आकार पर रुकना या अटकना नहीं है, अपितु साधना की पूर्णता करते हुए हमारे आराध्य आकार को भी विसर्जित कर निराकार की उपलब्धि करना है। शुक्रवार को दशहरे पर लोगों ने शास्त्रों की विधिवत पूजा की वाहनों की धुलाई के लिए सर्विस सेंटरों पर भीड़ लग रही है, लोगों ने वाहनों को धुलवाकर उनकी पूजा अर्चना की व सुरक्षा की कामना की। आज दशहरे के दिन शमी के पेड़ की पूजा हुई, जिनके घरों में शमी के पौधे नही थे, उन्होंने नर्सरी से शमी के पौधे ला कर घर मे लगाए। नर्सरियों से सबसे अधिक शमी के पौधे बिके, उनकी पूजा की गई।

Posted By: vikash.pandey

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