Navratri 2022: जाेगेंद्र सेन,(ग्वालियर नईदुनिया)। नाै दिवसीय नवरात्रि उत्सव में भक्त पूरे भक्तिभाव से मां की आराधना करते हैं। ज्याेतिषाचार्याें के मुताबिक हिंदू धर्म में शक्ति पूजा का महान ग्रंथ श्री दुर्गा सप्तशती अपने आप में पूर्ण तांत्रिक ग्रंथ है। इसका पाठ करने से प्रत्येक मनुष्य की कामना पूर्ति करने वाला तथा जीवन की हर समस्या का निदान करने वाला है। इस ग्रंथ में ऐसे ही छह विलक्षण मंत्राें के बारे में आज हम आपकाे बता रहे हैं, जिनकाे लेकर मान्यता है कि इनका पाठ करने से लाेगाें काे हर संकट से मुक्ति मिलती है।

ये हैं वह छह मंत्रः

'ज्ञानिनापि चेतांसि देवी भगवती हि सा,

बलादा कृष्य मोहाय महामाया प्रयच्छति।'

विधिः प्रबल आकर्षण वशीकरण के लिए इस मंत्र का 10 हजार बार जप कर 1000 आहूति से हवन करें। संकल्प में नाम बोलें।

सामग्री:पायस, तिल, घृत, इलायची, बिल्व आदि से हवन करें।

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'क्षणेन तन्महासैन्यंसुराणां तथा अम्बिका,

निन्ये क्षयं यथा वह्निस्तृणदारू महाचयम।'

विधिः यदि सामने बलवान शत्रु हो तथा जिसकाे पराजित करना मुश्किल हो, ताे इस मंत्र का जप कर दशांस होम, तिल, सरसों से करें।

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'गर्ज गर्ज क्षणं मूढ़ मधु यावत पिबाम्यहम्,

मया त्वयि हतेऽत्रैव गर्जिष्यान्तु देवता:।'

विधिः इस मंत्र का जप कर दशांस होम, तिल, सरसों से करें।

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'इत्युक्त: सोऽभ्यघावत् तामसुरो धूम्रलोचन:।

हुंकारेणैव तं भस्म सा यकाराम्बिका तत:।'

विधिः बड़े शत्रुओं को भयभीत करने के लिए इस मंत्र का जप करें।

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'दुर्गेस्मृता हरसि भीतिम शेष जन्तौ:,

स्वस्‍थै:स्मृता मतिमतीव शुभां ददासि:।

विधिः दुख-दारिद्र निवारण के लिए इस मंत्र काे जपें तथा पायस, बिल्वपत्र की आहूति दें।

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दारिद्र्य दुख:हारिणी का त्वदन्या,

सर्वोपकार कारणाय सदार्द्र चित्रा।।'

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'हत्वा रिपुनस्खलितं तव तत्र भविष्यति।'

विधिः पद प्राप्ति या अधिकार प्राप्ति के लिए इस मंत्र काे जपें तथा घृत, तिल, जौ आदि से हवन करें। विशेष यह मंत्र छोटा है।

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'रोगानशेषानपहंसि तुष्टा,

ददासि कामान् सकलान भीष्टान्।

त्वामाश्रितानां न विपन्नराणां,

त्वामाश्रिता ह्याश्रयतां प्रयन्ति।।'

विधिः रोगनाश, असाध्य बीमारी के लिए यह मंत्र महामृत्युंजय मंत्र की तरह कार्य करता है। सरसों, काली मिर्च, जायफल, गिलोय, नीम, आंवला, राई, तिल, जौ आदि से दशांस आहूति दें। बड़े रोगों में सवा लाख जप करें। इस मंत्र काे श्रद्धा व विश्वास के साथ जपें तथा माता दुर्गा की यथाशक्ति पूजा करें। 10 हजार जप कर दशांस हवन करें।

नाेटः इस लेख में दी गई जानकारी/सामग्री/गणना की प्रामाणिकता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं है। सूचना के विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/धार्मिक मान्यताओं/धर्मग्रंथों से संकलित करके यह सूचना आप तक प्रेषित की गई हैं। हमारा उद्देश्य सिर्फ सूचना पहुंचाना है, पाठक या उपयोगकर्ता इसे सिर्फ सूचना समझकर ही लें। इसके अतिरिक्त इसके किसी भी तरह से उपयोग की जिम्मेदारी स्वयं उपयोगकर्ता या पाठक की ही होगी।'

Posted By: vikash.pandey

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