ग्वालियर। मरीज को जब परिजन लेकर पहुंचे तो हालत काफी गंभीर थी। जब जांच की तो उसकी दोनों आर्टरी में ब्लॉकेज थे। हमने पहले मरीज को स्टैबल किया, इसके बाद कैथ लैब में मरीज की एंजियोप्लास्टी की गई। अब मरीज पूरी तरह स्वस्थ है। मरीज की हालत इतनी खराब थी कि यदि समय रहते उपचार नहीं मिला होता तो दिक्कत हो सकती थी। कैथ लैब होने से हम मरीज की जान बचाने में कामयाब हुए।

जयारोग्य अस्पताल के कार्डियोलॉजी विभाग के एचओडी डॉ. पुनीत रस्तोगी ने यह जानकारी बुधवार को पत्रकारों से चर्चा के दौरान दी। इस अवसर पर संभागायुक्त एमबी ओझा, जीआर मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. भरत जैन, जेएएच अधीक्षक डॉ. अशोक मिश्रा, कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. राम रावत एवं डॉ. गौरव कवि भी मौजूद थे। डॉ. रस्तोगी ने बताया कि भोपाल में जितने केस एक साल में हुए हैं, उतने जेएएच में 25 दिन में किए गए हैं।

उन्होंने बताया कि 4 सितंबर 2019 को कैथ लैब का शुभारंभ हुआ था, 6 सितंबर से कैथ लैब में मरीजों के ह्दय रोग की जांच शुरू कर दी गई थी। कैथ लैब शुरू होने के 32 दिनों में से कुल कार्यदिवस 25 में 110 केस सफलतापूर्वक किए गए हैं। इसमें 6 से 26 सितंबर तक ट्रायल फेज में केवल एंजियोग्राफी की गई, इसके बाद एंजियोप्लास्टी शुरू की गई। एक मरीज विश्वनाथ निवासी ग्वालियर का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि तीन दिन पहले जब अस्पताल पहुंचा तो उसकी हालत काफी खराब थी। जांच में पता चला कि बीपी 80 है और सीरियस हार्ट अटैक है। एक आर्टरी पूरी तरह ब्लॉक थी, हमने तुरंत कैथ लैब में मरीज को लेकर सर्जरी शुरू की, अब स्टेंट डालने के बाद मरीज पूरी तरह स्वस्थ है।

निजी अस्पताल से सस्ता उपचार

एंजियोप्लास्टी का निजी अस्पताल के मुकाबले अधिक शुल्क होने के सवाल पर डॉ. रस्तोगी ने कहा कि निजी अस्पतालों में शुल्क भले ही वह कम लिखें, लेकिन बेड चार्ज सहित अन्य खर्चे जोड़कर 90 हजार या सवा लाख तक बिल पहुंचता है। इतना ही नहीं केवल एक कार्डियोलॉजिस्ट की खड़े होने की फीस ही 25 हजार होती है। जबकि जेएएच में सिर्फ 55 हजार रुपए का खर्चा आता है। वहीं उन्होंने बताया कि जेएएच में दो कार्डियोलॉजिस्ट हमेशा मौजूद रहते हैं। इसके अलावा कोई अन्य चार्ज भी नहीं है। स्टेंट सरकारी रेट पर ही खरीदा जा रहा है, केवल कैथेड्रल सहित कुछ सामान जरूर अमृत से ले रहे हैं और वह थोड़ा महंगा पड़ रहा है। हालांकि संभागायुक्त ने कहा कि हम टेंडर का प्रयास करेंगे, जिससे मरीजों को कुछ राहत मिल सके।

एनपीए लेने वाले नहीं कर सकते प्राइवेट प्रैक्टिस

संभागीय कमिश्नर ने एक सवाल के जवाब में कहा कि कोई भी एनपीए लेने वाला डॉक्टर प्राइवेट प्रैक्टिस नहीं कर सकता है। डीन ही नहीं कोई भी हो सभी पर नियम लागू होते हैं। यदि कोई ऐसा कर रहा है तो जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि कार्डियक सर्जन का प्रस्ताव पेडिंग है, हम जल्द पास कराने का प्रयास करेंगे।

अब तक कितने मरीजों को मिला लाभ

-4 सितंबर को कैथ लैब का शुभारंभ

-6 सितंबर से कैथ लैब में जांच शुरू

-89 एंजियोग्राफी की गई

-17 मरीजों की एंजियोप्लास्टी हुई

-2 मरीजों को परमानेंट पेसमेकर लगाए गए

-1 मरीज को टेम्प्रेरी पेसमेकर लगाया

-1 पेरीकरडीयल लगाया गया

-11 मरीजों का आयुष्मान भारत योजना के तहत निशुल्क उपचार किया गया

कार्डियोलॉजी विभाग खुलने के बाद 1 जुलाई 2015 से अब तक कितने मरीजों को मिला लाभः

वर्ष भर्ती मरीज संख्या

जुलाई 2015 से दिसंबर 2015 तक 1647

2016 3833

2017 4178

2018 4796

2019 अगस्त तक 4091