ग्वालियर। नईदुनिया प्रतिनिधि

शहर में चल रहे नशा मुक्ति केंद्रों में मरीजों को दिया जाने वाला इलाज भरोसे के काबिल नहीं है। मरीजों को क्या इलाज दिया जा रहा है, कौन डॉक्टर दवा लिख रहा है, कहां से दवा ला रहे, इसका कोई प्रोटोकॉल नहीं है। इसी वजह से सामाजिक न्याय विभाग के ज्वाइंट डायरेक्टर डॉ संजीव खेमरिया ने स्वास्थ्य विभाग को पत्र लिख यह अवगत कराया है। हर 15 दिन में स्वास्थ्य विभाग की ओर से नशा मुक्ति केंद्रों की जांच की जाएगी। जिससे यह सामने आएगा कि इलाज कितने मानकों पर किया जा रहा है। अब स्वास्थ्य विभाग और सामाजिक न्याय विभाग जल्द ही संयुक्त रूप से नशा मुक्ति केंद्रों पर विजिट भी करेंगे।

ज्ञात रहे कि कुछ समय पहले ही सागरताल क्षेत्र स्थित न्यूलाइफ नशा मुक्ति केंद्र में इमरान खान नाम के मरीज की हत्या कर दी गई थी। केंद्र के अंदर इलाज के नाम पर इमरान को इतना टॉर्चर किया गया कि उसकी जान चली गई। मरीज के साथ इंचार्ज अमित वर्मा, स्टाफ कौशल सिकरवार व एक और अन्य ने मारपीट की थी। इसके बाद केंद्र संचालक सूरज सिंह राजपूत व स्टाफ इमरान को लेकर जेएएच पहुंचे, जहां पहले ही उसकी मौत हो चुकी थी। इस मामले के बाद न्यू लाइफ नशा मुक्ति केंद्र को बंद कर दिया गया और बहोड़ापुर थाना पुलिस ने आरोपियों पर हत्या का मामला दर्ज किया। इस केस में संचालक सूरज सिंह राजपूत पर भी अन्य धाराओं में केस दर्ज किया गया है।

4 ही रजिस्टर्ड, अवैध की जांच अभी भी बाकी

सामाजिक न्याय विभाग के अनुसार जिले में सिर्फ 4 ही नशा मुक्ति केंद्र रजिस्टर्ड हैं। वहीं ऐसे केंद्र काफी संख्या में खुले हुए हैं और मनमानी कर रहे हैं। इनकी बहोड़ापुर क्षेत्र में संख्या ज्यादा है जहां यह किराए की बिल्डिंगों में खुले हुए हैं। 7 से 10 हजार तक महीने का शुल्क मरीज के परिजनों से वसूला जाता है, अंदर क्या कर रहे हैं, इससे किसी को मतलब नहीं। इस मामले में सामाजिक न्याय विभाग के ज्वाइंट डायरेक्टर डॉ. संजीव खेमरिया ने संस्कार नशा मुक्ति केंद्र, प्रतिज्ञा नशा मुक्ति केंद्र और एक मोतीझील स्थित केंद्र में विजिट किया था। यहां हिसाब किताब और इलाज की व्यवस्थाएं ठीक नहीं मिलीं थी, लेकिन पंजीयन तीनों के पास है।

प्रोटोकॉल जरूरी, परिजन कैसे करेंगे भरोसा

नशा मुक्ति केंद्रों पर इलाज, व्यवस्थाओं सभी का प्रोटोकॉल बेहद जरूरी है। सिर्फ पंजीयन कराने के बाद संचालन की छूट देना जिला प्रशासन के लिए ठीक नहीं है, हाल ही में इमरान नाम के नौजवान की हत्या का मामला सामने आया जिससे अभी भी सबक ले लेना चाहिए। पंजीकृत होने के साथ-साथ प्रोटोकॉल भी निर्धारित होना चाहिए।

हर 15 दिन में होगी जांच

नशा मुक्ति केंद्रों की हर 15 दिन में स्वास्थ्य विभाग की ओर से जांच की जाना जरूरी है। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग को पत्र जारी कर दिया गया है। इलाज मरीजों को निर्धारित मानक से मिले यह आवश्यक है। केंद्रों का निरीक्षण भी किया जाएगा।

डॉ. संजीव खेमरिया,ज्वाइंट डायरेक्टर,सामाजिक न्याय विभाग