फोटो

ग्वालियर। नईदुनिया प्रतिनिधि

किलागेट निवासी संजय शाक्य हाथों में मेहंदी और कमर में कटार लटकाए कुछ दिन से नगर निगम के गलियारों में चक्कर लगा रहा है। उधर होने वाली दुल्हन भी मेहंदी रचाकर सात फेरों की बांट जोह रही है। निगम ने पहले 22, फिर 28 नवंबर और इसके बाद फिर 5 दिसंबर को शादी कराने का भरोसा दिया। बुधवार को दूल्हा अपने होने वाले साले घासमंडी निवासी अनिल को लेकर निगम मुख्यालय में शादी का कूपन लेने पहुंचा तो पता चला कि निगम कोई विवाह नहीं करा रहा। यह सुनकर दूल्हा परेशान हो गया। परेशानी इसलिए ज्यादा थी क्योंकि उसने बुधवार को मंडप का खाना देने सारे मेहमान भी घर पर बुला लिए। वरिष्ठ अधिकारियों को जब पता चला तो उन्होंने इसे अधीनस्थ अधिकारियों की लापरवाही बताया। सरकारी तंत्र की उलझन में उसकी शादी की तारीख फिर भी तय नहीं हो सकी।

मुख्यमंत्री कन्यादान योजना में मिलते हैं 51 हजार रुपए

मुख्यमंत्री कन्यादान योजना के तहत सामूहिक विवाह सम्मेलनों में शादी करने पर वर-वधु के नाम 51 हजार रुपए की सहायता राशि का चैक दिया जाता है। निगम भी साल में तीन-चार बार सामूहिक विवाह समारोह आयोजित करता है। लेकिन सरकार बदलने के बाद जब फंड रोक दिया गया तो निगम ने यह आयोजन करना बंद कर दिया। छह माह पहले सात फेरे ले चुके 30 जोड़े भी राशि मिलने का इंतजार आज तक कर रहे हैं। निगम अधिकारियों का तर्क है कि योजना के तहत 5 जोड़े जरूरी हैं, पर अब जोड़े नहीं हो पा रहे। इसके पीछे की सच्चाई यह है कि जिम्मेदार अधिकारियों ने योजना का प्रचार-प्रसार करना बंद कर दिया है।

सरकार बदलते ही रोका फंड

प्रदेश में सत्ता बदलते ही जनकल्याण की योजनाओं को ग्रहण सा लग गया है। विधवा, वृद्धावस्था, परित्यग्ता, निःशक्तजन पेंशन योजना का फंड रोक दिया गया है। इसके पिछे पात्र हितग्राहियों की जांच के नाम पर राशि रोकने की बात कही जा रही है।

इन प्रमुख योजनाओं की राशि रोकी

प्रमुख पेंशन योजनाएं:

केंद्र की इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वृद्धावस्था पेंशन, विधवा पेंशन, दिव्यांगता पेंशन, प्रदेश की सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजनाओं में वृद्धावस्था पेंशन, परित्यक्ता पेंशन, मुख्यमंत्री कल्याणी पेंशन, मुख्यमंत्री अविवाहित पेंशन, दिव्यांग शिक्षा प्रोत्साहन आदि योजनाओं संचालित हैं। पेंशन योजना में पात्र हितग्राहियों को 600 रुपए प्रति माह दिया जाता है। इन योजनाओं के 30 हजार से अधिक आवेदन स्वीकृत होने के बाद राशि के अभाव में अटके हैं। खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने अपनी विधानसभा में कैंप लगवाकर फार्म तो भरवा लिए, लेकिन अब राशि न मिलने पर हितग्राही मायूस हैं।

प्रधानमंत्री आवास योजनाः

हाउसिंग फॉर ऑल के तहत केंद्र सरकार प्रत्येक परिवार को अपना घर देना चाहती है। इसके लिए प्रधानमंत्री आवास योजना संचालित है। योजना में हितग्राही को अधिकतम 2 लाख 60 हजार रुपए तक सब्सिडी दी जाती है। निगम में बीएलसी हितग्राही (जिनके पास स्वयं का प्लॉट या जमीन का पट्टा है, उस पर घर बनाना) के आवेदन भी जमा कराना बंद कर दिया है। जिनके आवेदन जमा हैं उन्हें अब तक राशि नहीं दी जा सकी है। करीब सात सौ से अधिक आवेदन अभी जांच में हैं।

सरकारी दुकानों से खाद्यान्नाः

पात्र हितग्राहियों को सरकारी उचित मूल्य की दुकानों से सस्ती दर पर गेंहू, चावल, शक्कर आदि खाद्यान्ना मिलता है। करीब 12 हजार लोग खाद्यान्ना के लिए भटक रहे हैं, जबकि उनके आवेदन स्वीकृत हो चुके हैं परंतु पर्ची (जिससे राशन मिल सके) नहीं दे रहे। नए हितग्राहियों का तो अभी आधार सत्यापन ही नहीं हो सका है।

प्रमुख योजनाओं की स्थिति

योजनाओं का नाम सहायता राशि कितने आवेदन लंबित(स्वीकृत)

प्रधानमंत्री आवास 2 लाख 60 हजार 740

विभिन्ना प्रकार की पेंशन 600 रुपए 30472

मुख्यमंत्री कन्यादान 51 हजार(वर-वधु) 30

आकस्मिक दुर्घटना 2 और 4 लाख 60

खाद्यान्ना सामग्री 1 रुपए प्रति किग्रा 15000

नोटः सहायता राशि प्रति हितग्राही तथा राशि रुपए में हैं।

घर में हैं रिश्तेदार

निगम ने 22, 28 नवंबर, फिर 6 दिसंबर को शादी कराने की बात कही। मैंने मंडप पर खास रिश्तेदारों को बुधवार को खाने पर बुला लिया। दोपहर में जब कूपन लेने निगम मुख्यालय पहुंचा तो बताया कि पांच जोड़े नहीं हुए हैं, इसलिए शादी नहीं होगी।

संजय शाक्य, होने वाला दूल्हा

गंभीर लापरवाही है

- पांच जोड़े न होने से विवाह समारोह आयोजित नहीं हुआ। वर-वधु पक्ष को 5 दिसंबर के लिए भरोसे में रखना गंभीर लापरवाही है। मैंने इसका स्पष्टीकरण मांगा है।

राजेश श्रीवास्तव, अपर आयुक्त ननि

Posted By: Nai Dunia News Network