कोरोना संदिग्ध का इलाज देने वाले दो डॉक्टर सहित एक युवती आइसोलेशन में भर्ती, सैंपल

ग्वालियर।नईदुनिया प्रतिनिधि

कोरोना वायरस संपर्क में आने से फैलता है। यह सबको पता है। रिपोर्ट भी यही कहती है। इसके संपर्क में आने से इटली और चीन में डॉक्टर और नर्सों ने भी अपनी जान गंवाई है, लेकिन इसके बाद भी शहर में कोरोना संदिग्धों की जांच कर रहे डॉक्टरों के लिए सुरक्षा (प्रोटेक्शन) किट नहीं मिल रही है। हाल यह है कि संदिग्ध मरीजों के सैंपल तक नहीं लिए जा रहे हैं। इस स्थिति में यह ही नहीं पता चल रहा है कि मरीज कोरोना पॉजिटिव है या निगेटिव। लक्षण के आधार पर होम आइसोलेशन की सलाह दी जा रही है। यह लापरवाही जानलेवा है। इस महामारी से लड़ने के लिए सरकार भरपूर बजट उपलब्ध करा रही है। इसके बाद भी स्थानीय स्तर पर संसाधन जुटाने में लापरवाही बरती जा रही है। कोरोना से स्वास्थ्य विभाग किस तरह से लड़ रहा है इसका एक नमूना सैंपल लेने की संख्या से है। जिले में महज 19 संदिग्धों के सैंपल लिए गए हैं, जिसमें से 8 की रिपोर्ट निगेटिव आई है और एक मरीज पॉजिटिव मिला है। जबकि महामारी फैसने के बाद 176 लोग विदेश से आए हैं।

बजट भरपूर-

जिले को 29 लाख का बजट मिला है। इसके साथ ही विधायक प्रवीण पाठक ने 15 लाख का फंड, विधायक निधि से उपलब्ध करवाया है। इसके बाद भी सुरक्षा के इंतजाम नहीं है। यदि डॉक्टर ही बीमार होने लगे तो महामारी लाइलाज हो जाएगी। पहले चार डॉक्टरों को आइसोलेशन जाना पड़ा था अब दो और चले गए। यहां तक की कोरोना बचाव कोलेकर प्रचार-प्रसार के नाम पर बैनर पोस्टर तक नहीं लगाए गए। अस्पताल में साइन बोर्ड भी नहीं लगाए गए, जिससे मरीज भटकता रहता है।

कोरोना से लड़ने के लिए नहीं है संसाधन-

मैदानी अमले और अस्पताल में काम कर रहे डॉक्टरों के पास न संसाधन मौजूद हैं और न ही उनके सुरक्षा के इंतजाम है। जिला अस्पताल में काम करने वाले डॉक्टर व स्टाफ को साधारण मास्क दिए गए। शुरुआत में कोरोना पॉजिटिव मरीज की जांच डॉक्टरों ने बिना प्रोटक्शन के की थी, दो डॉक्टरों में लक्षण दिखाई देने पर उन्हें आइसोलेशन में रखना पड़ा। वहीं, स्टाफ व एक डॉक्टर सीएमएचओ को कोरोना की जांच के लिए पत्र लिख चुका है। देहात में काम करने वाले डॉक्टर को एन-95 मास्क, सैनिटाइजर, प्रोटक्शन किट तक उपलब्ध नहीं करवाई गई।

अस्पताल में न जांच न सैनिटाइजेशन-

बाहर से आने वाला हर व्यक्ति जिसे सर्दी, खांसी या जुकाम, बुखार जैसी शिकायत होने पर जिला अस्पताल जांच करवाने पहुंच रहा है। पर यहां न तो उसकी जांच होती और न हीं ठीक से उसे इलाज मिल पा रहा है। आलम यह है कि डॉक्टर भी उसे होमआइसोलेशन में रहने की सलाह देकर रवाना कर रहे हैं। इसके कारण इस बात का पता नहीं चलता कि उसमें कोरोना के लक्षण थे या फिर मौसमी बीमारी से पीड़ित था। खास बात यह है कि अस्पताल में ठीक से सैनिटाइजेशन भी नहीं किया जा रहा है। जिससे वायरस फैलने का खतरा बढ़ सकता है।

संसाधन के नाम पर वाहनों का आवगमन-

अस्पतालों में संसाधन के नाम पर वाहनों का आवगमन बढ़ गया है। जबिक नॉन टच थर्मामीटर, ग्लवस, एन-95 मास्क, प्रोटक्शन किट की कमी है। मरीजों के घर-घर जाकर स्क्रीनिंग करने वाले डॉक्टरों के दल के पास नॉन टच थर्मामीटर और गुणवक्ता पूर्ण मास्क तक उपलब्ध नहीं करवाए जा सके।

लॉकडाउन तो किया पर स्कीनिंग किसी की नहीं-

कोरोना पॉजिटिव मरीज मिलने पर चेतकपुरी, विजयनगर, माधव नगर, बसंत बिहार कॉलोनी को लॉकडाउन किया। पर वहां के निवासियों की जांच या स्क्रीनिंग के लिए अमला नहीं भेजा गया। इस बात से अनुमान लगा लिया गया कि उसकी पत्नी में जब कोरोना के वायरस नहीं पाए गए तो अन्य में भला कैसे आ सकते।

स्वास्थ्य विभाग के स्टोर में उपलब्धता देखिए, फिर जान जाएंगे कि क्या हालात हैं

सीएमएचओ स्टोर सिविल सर्जन स्टोर

इंतजाम मौजूद ऑर्डर मौजूद ऑर्डर

मास्क एन-95 0000 5000 10 500

पीपीई किट 140 5000 23 400

सैनिटाइजर 0000 20000 00 500

हाईड्रोक्लाराइड 0000 20000 25 150लीटर

Posted By: Nai Dunia News Network