-इकाइयों पर बरती गई सख्ती से खफा उद्यमी, बोले-फैक्ट्री बंद करने में 1 घंटा लगता है चालू करने में नहीं

ग्वालियर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। कोविड 19, कोरोना वायरस के एहतियातन 22 फरवरी को अंचल के बानमोर, मालनपुर, बाराघाटा, बिरला नगर समेत अन्य सभी औद्योगिक क्षेत्रों में इकाइयों ने जनता कर्फ्यू का समर्थन कर पूर्णतः शटडाउन रखा। लेकिन 23 फरवरी को धारा 144 लगाते हुए मुरैना, ग्वालियर, भिंड को प्रशासन द्वारा बंद कराया गया। लेकिन कर्फ्यू के फेर में प्रशासन ने बानमोर समेत अन्य औद्योगिक क्षेत्रों की फूड प्रोसेसिंग इकाइयों को भी बंद करा दिया। अब आटा, दाल, चावल, तेल, शक्कर व ब्रेड-बिस्किट जैसी आवश्यक खाद्य सामग्री का बाजार से स्टॉक खत्म हो रहा है। प्लांटों में प्रोडक्शन बंद है ऐसे में खाद्य सामग्री की अंचल में सप्लाई पूरी तरह से बंद है। संकट के इस समय में भी थोक व खेरिज किराना व्यापारियों ने कालाबाजारी शुरू कर महंगाई बढ़ा दी है। अब प्रशासन प्रयास कर रहा है कि दोबारा से फूड प्रोसेसिंग से जुड़े प्लांट, मिल आदि शुरू हो जाएं, लेकिन उद्यमी प्रशासन से व्यवहारिक व्यवस्थाएं करने की मांग कर रहा है।

गौरतलब है कि हाल में बानमोर में कलेक्टर प्रियंका दास ने कुछ प्लांट सख्ती से बंद करा दिए थे। इस बात से उद्यमी खफा हैं, उद्यमियों का आरोप है कि कर्मचारियों के साथ प्रशासन ने अभद्रता की, जिसके बाद वर्कर उत्तर प्रदेश समेत सैंकड़ों किलोमीटर स्थित अपने घर निकल गए। वहीं कुछ उद्यमी यह कह रहे हैं कि कोरोना कर्फ्यू के चलते कामगारों को प्लांट तक आने में परेशानी होगी। पुलिस मारपीट न करे इसके लिए प्रशासन लेवर के लिए निश्चित समयावधि के पास बनाकर दे। साथ ही कच्चा माल (गेंहू आदि) लाने व प्रोडक्ट सप्लाई के लिए ट्रांसपोटेशन की मंजूरी दे। तभी प्लांट चालू हो सकते हैं।

प्लांट बंद करने में एक घंटा लगता है, चालू करने में नहीं

उद्यमियों का कहना है कि प्रशासन ने सख्ती दिखाकर प्लांट बंद करा दिए, इससे हमें कोई परेशानी नहीं हैं। कोरोना से बचने के लिए प्रशासन का सख्त होना जरूरी भी है। लेकिन प्लांट को बंद करने में भलें 1 घंटा लगता हो, उसे दोबारा चालू करने के लिए बहुत व्यवस्थाएं करनी पड़ती हैं, जिसमें सप्ताह से अधिक लग जाता है। गौरतलब है कि आटा, मैदा, सूजी, बेसन, दलिया की मुरैना शहर में 10-12, बानमोर में 4-5 व ग्वालियर में 15-20 मिल व प्लांट हैं। सब बंद हैं।

-कलेक्टर ने फूड प्रोसेसिंग संबंधी सभी मिल व प्लांट आदि बंद करा दिए, अब दोबारा से मिल चालू करने को कहा जा रहा है। लेकिन इन हालातों में प्लांट संचालित करना इतना आसान नहीं है। क्योंकि मंडी से गेंहू तक नहीं आ पा रहा। कामगारों का भी आ पाना फिलहाल संभव नहीं है।

मोहन गर्ग, संचालक, गालव आटा इंडस्ट्रीज बानमोर

-फूड इंडस्ट्री चालू रखने के केंद्र सरकार के आदेश हैं, लेकिन यह व्यवहारिक नहीं हो पा रहा। ब्रेड बनाने के लिए गेंहू शक्कर समेत तमाम कच्चा माल लगता है। ब्रेड अमीर व गरीब के लिए आवश्यक खाद्य पदार्थ है। वर्तमान में उद्यमियों की कोई मदद नहीं रही, बस परेशान किया जा रहा है। लोडिंग वाहन चालक डर रहे हैं पुलिस उन्हें रास्ते में पीट न दे। वर्कर का इंतजाम कर लेंगे, लेकन उनके लिए भी प्रशासन को पास बनाने होंगे। इंतजाम जल्द करने होंगे अन्यथा अफरा-तफरी मच जाएगी।

धर्मवीर सिंह भदौरिया, मैनेजिंग डायरेक्टर, मॉर्डन ब्रेड बानमोर (पूर्व अध्यक्ष बानमोर इंडस्ट्रीज एसोसिएशन)

-खाद्य सामग्री का प्रोडक्शन तो जारी रहना ही चाहिए, क्योंकि व्यापारियों के यहां अभी नहीं तो 10 दिन में स्टॉक खत्म हो ही जाएगा। प्लांट चलाने के लिए लेवर हम प्रशासन से परमिशन मिलने के बाद ही बुलाएंगे, क्योंकि रिस्क नहीं लिया जा सकता। कामगारों के लिए प्रशासन को पास भी बनाकर देने होंगे, जिससे पुलिस उन्हें न रोके। बाकी प्लांट में सैनिटाइजर व हाथ धोने आदि की व्यवस्था हम करेंगे।

-गिर्राज बंसल, संचालक, ओमश्री शुभ-लाभ एग्रीटेक प्रा.लि मालनपुर (स्मार्ट वाइफ दाल, आटा, खाद्य तेल, शक्कर आदि)

वर्जन

आटा, दाल मिल जैसी फूड इंडस्ट्रीज को शुरू करने की अनुमति दी जा रही है। इसके लिए खाद्य सुरक्षा अधिकारी को वॉट्सएप पर संबंधित इंडस्ट्री संचालक पूरी जानकारी भेजें। जिसमें इकाई में काम करने वाले कामगारों के साथ ही समस्त स्टाफ की संख्या व अन्य सभी जानकारी शामिल हों।

प्रियंका दास, कलेक्टर, मुरैना

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