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ग्वालियर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। कोरोना वायरस के चलते देश को 21 दिन के लिए लॉकडाउन कर दिया गया है। इस दौरान बस, रेल, सहित सभी वाहन बंद हैं। इसके चलते सैकड़ों की संख्या में लोग जहां पर थे वहीं फंस गए हैं। ग्वालियर में फंसे करीब 150 से 200 लोगों को बस स्टैंड पर रैनबसेरा में ठहराया गया है। लेकिन यहां पर भोजन की पर्याप्त व्यवस्था नहीं हो पा रही है। हालांकि यह लोग दीनदयाल रसोई में भोजन कर रहे हैं लेकिन वहां पर भरपेट भोजन नहीं मिल पा रहा है।

नईदुनिया की टीम ने शुक्रवार की दोपहर को बस स्टैंड पर रैनबसेरा में जाकर वहां पर ठहरे लोगों से बात की। वहां पर बताया गया कि लगभग 200 लोग यहां पर ठहरे हुए हैं। इनमें से जितने लोग रैनबसेरा में पलंगों पर आ सकते हैं वहां रैनबसेरा में हैं। बाकी के लोग बस स्टैंड के टिकिट खिड़की के पास रूके हैं। इन लोगों के खाने की व्यवस्था प्रशासन ने दीनदयाल अंतोदय रसोई में की है। लेकिन वहां पर प्रत्येक व्यक्ति को चार रोटी और सब्जी दी जा रही है। चूंकि यहां लोग मजदूर वर्ग से हैं इसलिए इनकी भोजन की खुराक भी अधिक है। ऐसे में इन लोगों का पेट नहीं भर पा रहा है।

दिन में बाहर छांव में करते हैं आराम

रात को रैनबसेरा में ठहरे हुए लोग वहीं पर आराम करते हैं, लेकिन दिन में यह लोग बस स्टैंड पर छांव में आराम कर रहे हैं। साथ ही कई लोग पेड़ों की छांव में आराम करते हुए एक-दूसरे को अपने बारे में बता रहे हैं।

स्वयंसेवी संगठन कर रहे हैं मदद

स्वयंसेवी संगठनों को अभी रैनबसेरा में ठहरे हुए लोगों के बारे में अधिक जानकारी नहीं है। इसके कारण यहां पर अधिक मदद नहीं पहुंच पा रही है। हालांकि कई संगठनों द्वारा लगातार यहां पर जितनी हो सके मदद पहुंचाई जा रही है।

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पल्लेदारी करता हूं, भरपेट नहीं मिल पा रहा भोजन

मैं महोबा का निवासी हूं, ग्वालियर में मजदूरी करता हूं। मेरा काम निर्माणाधीन मकानों की छत तक बजरी और ईंटों को पहुंचाने का रहता है। लॉकडाउन की जानकारी नहीं होने के कारण मैं यहां से समय पर नहीं निकल सका। इसके कारण तीन दिन से यहां पर फंसा हूं। यहां पर दीनदयाल रसोई में एक समय में चार रोटियां मिल रही हैं जिससे पेट नहीं भर रहा है। हालांकि कुछ लोग आज सुबह आए थे उन्होंने चाय और ब्रेड आदि भी दिए।

सुरेन्द्र नरसिंह, निवासी महोबा

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मैं लहार का रहने वाला हूं, घर से मथुरा-वृंदावन सहित चार धाम की यात्रा करने निकला था। लेकिन ग्वालियर में फंस गया हूं।

प्रेमकुमार, निवासी लहार

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मैं दाल बाजार में किराने की दुकान पर कार्य करता हूं। लॉकडाउन के कारण दुकान बंद हो गई। अब घर जा रहा हूं, लेकिन यहीं पर फंस गया।

योगेश परिहार, भिंड निवासी

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नगर निगम द्वारा शहर में 7 रेन बसेरा संचालित किए जा रहे हैं। इनमें 300 से 400 लोग ठहर सकते हैं। जो लोग अपने घरों में नहीं जा पाएं हैं, ऐसे लोगों को यहां ठहराया गया है। इन लोगों के लिए भोजन का प्रबंधन भी किया जा रहा है। साथ ही समाजसेवी संस्थाओं से भी मदद ली जा रही है।

अतिबल सिंह, नोडल अधिकारी जनकल्याण विभाग नगर निगम

Posted By: Nai Dunia News Network

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