ग्वालियर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। क्वारंटाइन सेंटर में रखे गए संदिग्ध कोरोना मरीज एवं कोरोना पॉजिटिव मरीजों के लिए अलग-अलग खाने का मैन्यु है। क्वारंटाइन सेंटर में मरीजों को 150 रुपये में दोनों समय का खाना एवं चाय नाश्ता दिया जा रहा है। जबकि जेएएच प्रबंधन केवल नाश्ते पर ही करीब 60 रुपये खर्च कर रहा है। वहीं कोरोना पॉजिटिव मरीजों के लिए आने वाला दोनों टाइम का भोजन करीब 220 रुपये का है। इसमें नाश्ता भी शामिल है। खास बात ये है कि मरीज इस भोजन से संतुष्ट नहीं है। लोगों का कहना है कि रोटियां कभी जली तो कभी कच्ची आती हैं। वहीं नाश्ते के पैकेट में सामान खुला रहता है, साथ ही फल भी अक्सर सड़े हुए पहुंचा दिए जाते हैं।

कोरोना संदिग्ध मरीजों का मैन्यु

मैन्युः-5 रोटी, दाल, चावल, सलाद

नाश्ताः-चाय, ब्रेड पकौड़ा/आलू बड़ा, एक मिठाई

दोनों वक्त के भोजन की कीमतः-150 रुपये दोनों समय का खाना एवं नाश्ता

कोरोना पॉजिटिव मरीजों के लिए खानाः-

मैन्युः-5 रोटियां, दो प्रकार की सब्जी, चावल, दाल, सलाद एक मिठाई

नाश्ताः-चाय, ब्रेड पकौड़ा/आलू बड़ा, एक मिठाई एवं जेएएच में दो प्रकार के फल, 100 ग्राम मक्खन एवं चार ब्रेड एवं चाय

दोनों वक्त के भोजन की कीमतः-करीब 220 रुपये दोनों वक्त का भोजन एवं नाश्ता, जेएएच में नाश्ते पर करीब 60 रुपये एक मरीज पर खर्च

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कितनी सप्लाईः-

क्वारंटाइन सेंटरः-अब तक करीब 300-400 पैकेट सप्लाई हो रहे थे। शनिवार को केवल 80 पैकेट की डिमांड थी।

डॉक्टर एवं स्टाफः-होटल एवं अन्य जगह क्वारंटाइन रहने वाले डॉक्टर या स्टाफ के लिए 75 पैकेट खाने के पहुंचाए गए हैं।

कोरोना पॉजिटिव मरीजः-80 थाली शनिवार को

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खाने से महंगा नाश्ताः-

जयारोग्य अस्पताल के सुपर स्पेशियलिटी को कोरोना मरीजों के लिए आरक्षित किया गया है। यहां पहले स्वास्थ्य विभाग ही खाने का प्रबंध करता था। मरीजों ने जब नाश्ते को लेकर शिकायत दर्ज कराई तो अब जेएएच के द्वारा नाश्ता उपलब्ध कराया जा रहा है। प्रतिदिन एक मरीज के नाश्ते पर करीब 60 रुपये खर्च किए जा रहे हैं।

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पुराने टेंडर पर सप्लाईः-कोरोना पॉजिटिव या संदिग्ध मरीजों को खाने की सप्लाई के लिए स्वास्थ्य विभाग ने कोई नया टेंडर नहीं किया है। 2018-19 के पुराने रेट पर ही ठेकेदार को ठेका दिया गया है।

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क्या कहते हैं मरीजः-

वर्जनः-

वैसे तो खाना ठीक है, लेकिन रोटियां जली हुई आ रही हैं। नाश्ते में रोजाना अंगूर एवं केले दिए जा रहे हैं। अक्सर फल सड़े हुए आते हैं। फल भी एक ही प्रकार के रोज दे दिए जाते हैं।

सचिन, निवासी लक्ष्मीगंज

वर्जनः-

खाना पूरी तरह से खराब है। रोटियां जली हुई तो कभी कच्ची आती हैं। चावल देखकर लगता है कि रात के ही सुबह पहुंचा दिए हैं। रबर जैसे चावल हैं। शाम को उन्हीं चावल को फ्राय करके पहुंचा दिया जाता है। नाश्ते में खुला बटर, ब्रेड थैली में रखकर देते हैं, वह सब एक दूसरे में मिल जाता है। ब्रेड में खटासपन भी आता है।

पंकज गुप्ता, निवासी डबरा

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क्या कहते हैं जिम्मेदारः-

वर्जनः-

क्वारंटाइन सेंटर एवं जेएएच को छोड़कर अन्य जगह हम खाना एवं नाश्ते का प्रबंध कर रहे हैं। जेएएच में केवल भोजन पहुंचाया जाता है। मरीजों के लिए एक टाइम का भोजन एवं नाश्ता 110 रुपये का है, दोनों टाइम का करीब 220 रुपये का पड़ता है। हमें कच्ची रोटियों की तो शिकायत मिली थी, जली हुई रोटी की कोई बात नहीं आई है। वैसे हम खुद मॉनीटरिंग कर रहे हैं, शिकायत मिलने पर तुरंत जांच भी की जा रही है। हम खुद भी कई बार पैकेट का भोजन ही करते हैं, खाना तो ठीक है।

डॉ. मनोज पाटीदार, नोडल ऑफिसर भोजन वितरण व्यवस्था

Posted By: Nai Dunia News Network

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