फोटो

ग्वालियर। नईदुनिया प्रतिनिधि

अमृत योजना के तहत सीवर और पानी की लाइन निर्धारित मापदंडों के तहत डाली जा रही हैं अथवा नहीं, उखड़ी सड़कों की मरम्मत(रेस्टोरेशन) सही हो रहा है या नहीं, इसकी रिपोर्ट अब जलप्रदाय विभाग के असिस्टेंट तथा सब इंजीनियरों को देना होगी। उन्होंने अपने-अपने क्षेत्रों में घूमना होगा और कार्य की मॉनीटरिंग करना होगी। ऐसा न होने पर उनके विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। नगर निगम पीएचई के अधीक्षण यंत्री आरएलएस मौर्य ने सोमवार को इसके आदेश जारी कर दिए। आदेश पर सवाल खड़े हो गए हैं कि क्योंकि अमृत योजना के तहत लाइनें बिछाने का काम लगभग खत्म होने को है और रेस्टोरेशन भी पूरा होने के है। ऐसे वे कार्य की गुणवत्ता की रिपोर्ट कैसे दे सकेंगे।

वार्ड वाइज पेश करना होगी रिपोर्ट

मौर्य ने विभागीय आदेश जारी कर इंजीनियरों से कहा है कि पानी की लाइनें उचित गहराई पर डली है अथवा नहीं, सड़कों का रेस्टोरेशन गुणवत्तापूर्ण हुआ है या नहीं, इसकी वार्ड वाइज रिपोर्ट प्रस्तुत करना होगी। भौतिक सत्यापन के लिए उन्हें क्षेत्र में भ्रमण करना होगा। मौके पर जाकर ही रिपोर्ट देना होगी।

एडीबी योजना को बनाया उदाहरण

अमृत योजना से पहले शहर में एशियन डवलपमेंट बैंक(एडीबी) से ऋण लेकर पानी की टंकी बनवाई थीं और लाइन बिछाई थीं। इस प्रोजेक्ट में गड़बड़ियों की अब तक शिकायतें हो रही हैं। इसे उदाहरण बनाते हुए मौर्य ने इंजीनियरों से कहा है कि प्रोजेक्ट खत्म होते ही उन्हें ही इन शिकायतों से जूझना पड़ेगा। इसलिए अभी से मॉनीटरिंग में लग जाएं। अब आदेश को जारी हो गया लेकिन मैदानी इंजीनियरों की चिंता यह है कि जब रेस्टोरेशन हो गया, लाइन डल गईं तो उनकी गहराई और गुणवत्ता की जांच कैसे करेंगे। शुरूआत में ही यदि उन्हें यह जिम्मेदारी दे दी जाती तो यह संभव था।

निगम के क्षेत्राधिकारियों ने खींचे हाथ

अमृत योजना का कार्य और उनकी मॉनीटरिंग के लिए सरकार ने पीडीएमसी नामक एजेन्सी अधिकृत की है। एजेन्सी के ही इंजीनियर यह काम कर रहे हैं। सुपरविजन का काम निगम में शामिल पीएचई के उच्चाधिकारियों पर है। इसलिए अब तक असिस्टेंट इंजीनियर और सब इंजीनियरों को इस काम से दूर रखा गया था। नगर निगम आयुक्त संदीप माकिन ने भी अपने क्षेत्राधिकारियों(जेडओ) को तीन माह पहले गुणवत्ता की जांच कर रिपोर्ट देने की जिम्मेदारी सौंपी थी। निगमायुक्त का प्रयास था कि किसी भी तरह ओके रिपोर्ट लगवा ली जाए जिससे पीडीएमसी को घपले-घोटालों के आरोपों से मुक्त कर दिया जाए। चूंकि रेस्टोरेशन के काम लगभग हो चुका है फिर गुणवत्ता कैसे जांची जाए, यही सवाल खड़े करते हुए जेडओ ने जांच से हाथ खड़े कर दिए थे।

एक नजर में मुरार सीवर प्रोजेक्ट

अमृत योजना प्रोजेक्ट को मिली कुल राशिः 733 करोड़

पानी के कार्यों के लिए राशिः 207.97 करोड़

पानी की लाइनें बिछाई जाएंगीः 777 किलोमीटर

वर्तमान स्थितिः शहर में अब तक 610 किलोमीटर लाइन बिछाई गई हैं।

उखड़ी सड़कों का रेस्टोरेशन कार्य हुआः 350 किलोमीटर

पानी की नई टंकियां बनेंगीः 43

वर्तमान स्थितिः 39 टंकियों का काम शुरू हुआ जिसमें से 6 की ट्रायल शुरू हो गई है।

वाटर ट्रीटमेंट प्लांटः जलालपुर में 160 एमएलडी क्षमता का बनना है।

वर्तमान स्थितिः जमीन का विवाद होने पर काम देरी से शुरू हो सका था। इसका निर्माण कार्य अभी 62 फीसदी ही हो सका है। अधिकारी सितंबर-अक्टूबर तक काम पूरा होने की आस लगाए हैं।

तीसरी लाइनः तिघरा से जलालपुर में निर्माणाधीन वाटर ट्रीटमेंट प्लांट तक पानी की 22 किलोमीटर नई लाइन बिछाना है जिसमें से 17 किमी डाली जा चुकी है।

इनका कहना है

लाइनें सही डाली जा रही हैं या नहीं, उखड़ी सड़कों का रेस्टोरेशन गुणवत्ता से साथ हो रहा है या नहीं, इसकी जांच निर्देश सहायक व उप यंत्रियों को दिए हैं। उन्हें तो शुरूआत से ही मॉनीटरिंग करना थी।

आरएलएस मौर्य, अधीयण यंत्री पीएचई ननि

Posted By: Nai Dunia News Network

नईदुनिया ई-पेपर पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करे

नईदुनिया ई-पेपर पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करे

डाउनलोड करें नईदुनिया ऐप | पाएं मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और देश-दुनिया की सभी खबरों के साथ नईदुनिया ई-पेपर,राशिफल और कई फायदेमंद सर्विसेस

डाउनलोड करें नईदुनिया ऐप | पाएं मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और देश-दुनिया की सभी खबरों के साथ नईदुनिया ई-पेपर,राशिफल और कई फायदेमंद सर्विसेस

ipl 2020
ipl 2020