ग्वालियर, नईदुनिया प्रतिनिधि। तीसरी लहर का संक्रमण अपने चरम की ओर अग्रसर है। हालांकि राहत की बात है कि अस्पताल में पहली और दूसरी लहर के जैसे हालात नहीं हैं। कोरोना मरीजों को न आक्सीजन की जरूरत पड़ रही है न दवा बाजार में जीवन रक्षक दवाओं के लिए अफरा-तफरी है। जिले में कोविड के 4239 एक्टिव मरीजों के बावजूद कुल 64 मरीज ही हैं, जो अस्पतालों में भर्ती हैं। इनमें से 90 फीसद मरीज ऐसे हैं, जो किसी न किसी लंबी बीमारी के चलते भर्ती हुए हैं और कोविड पाजिटिवि पाए गए हैं। डाक्टरों का कहना है पहली व दूसरी लहर में कोविड मरीज के भर्ती होने पर उसे लक्षण अनुसार रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने काढ़ा, एंटीबायोटिक दवाएं, रेमडेसिविर सहित अन्य दवाएं देने पड़ रही हैं। साथ ही मरीजों को आक्सीजन की जरूरत भी पड़ रही थी। इस बार अधिकांश मरीजों को सामान्य मौसमी बीमारी का उपचार दिया जा रहा है। मरीजों को न सीटी स्कैन की जरूरत पड़ रही न आक्सीजन की।

15 मरीजों को पड़ी आक्सीजन की जरूरत

जयारोग्य अस्पताल (जेएएच) के सुपर स्पेशियलिटी हास्पिटल में कोविड के गंभीर मरीज ही भर्ती किए जाते हैं। यहां अब तक 38 मरीज भर्ती हुए, जिसमें से 15 मरीजों को आक्सीजन की आवश्यकता पड़ी। इसके अलावा आठ मरीजों को वेंटिलेटर पर रखना पड़ा। इन आठ मरीजों में दो मरीज ऐसे थे, जिनके फेंफड़ों में संक्रमण पहुंचा था। इसमें 60 वर्षीय हनीफ खान के फेफड़े 40 फीसद संक्रमित थे, वह 10 दिन भर्ती रहने पर स्वस्थ हुए। अनीता शर्मा(परिवर्तित नाम) भर्ती हैं, जिन्हें कोविड से फेफड़ों में संक्रमण और अस्थमा भी है। इस कारण उन्हें आक्सीजन देनी पड़ी, अब वह ठीक हैं। शेष मरीजों में किडनी, लिवर, शुगर, बीपी, ह्दय रोग, ब्रेन हेमरेज आदि की शिकायत के साथ भर्ती हुए, जो जांच में कोविड पाए गए।

जांच व इलाज में परिवर्तन

पहली, दूसरी और अब तीसरी लहर में जेएएच में व्यवस्था देख रही कोविड की नोडल अधिकारी डा. नीलमा सिंह का कहना है मरीजों का इलाज उनकी बीमारी के हिसाब से दिया जा रहा है। जिन मरीजों में संक्रमण, घाव, आपरेशन हुआ है, उन्हें स्टेरॉयड दी जाती है। बाकी में सामान्य लक्षण या कम आक्सीजन पर भी मरीज को स्टेरॉयड नहीं दी जा रहीं। इसी तरह से एंटीबायोटिक भी दी जा रही है। जेएएच में भर्ती होने वाले किसी भी मरीज का सीटी स्कैन नहीं कराना पड़ा। सांस की परेशानी व फेफड़े में संक्रमण देखने के लिए एक्सरे का सहारा लिया जा रहा है। हालांकि भर्ती मरीजों का डी-डायमर जरूर कराया जाता है।

सामान्य फ्लू की तरह दिया इलाज

परिवार हास्पिटल के डा. मनोज गुलाटी का कहना है कि अब तक कोविड के 20 मरीज भर्ती होकर इलाज ले चुके हैं। इनमें से महज चार मरीजों को ही आक्सीजन देने की आवश्यकता पड़ी। इन सभी का इलाज सामान्य फ्लू के तौर पर किया गया। स्टेरॉयड या फैबीफ्लू, रेमडेसिविर अथवा अन्य जीवन रक्षक दवाएं देने की आश्यकता नहीं रही, न ही सीटी स्कैन कराया गया।

वर्जन

पहली लहर की तरह लक्षण के आधार पर ही मरीजों को इलाज दिया जा रहा है। इस बार गंभीर मरीजों को ही स्टेरॉयड, एंटीबायोटिक व रेमडेसिविर दे रहे हैं। अभी सिर्फ चार मरीजों को रेमडेसिविर दिया है। जो मरीज गंभीर नहीं वह सामान्य दवाओं से दो से तीन दिन में स्वस्थ्य हो रहे हैं।

डा. विनोद धाकड़, मेडिसिन विभाग व कोविड इंचार्ज, जेएएच

Posted By: anil.tomar

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