Gwalior News राकेश वर्मा, ग्वालियर। आचार संहिता की वजह से सरकारी काम काज तो ठप हैं ही। साथ ही शस्त्रों का प्रदर्शन भी बंद हैं। यहां तक कि 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के समय गंगादास महाराज की बड़ी साला से महात्माओं व साधुओं ने लक्ष्मीबाई की सहायता के लिए अंग्रेजों पर बारूद उगलने वाली अकबर की मिनी तोप की आवाज भी नहीं गूंजी।

हर साल दशहरे पर इस तोप का पूजन किया जाता है और इसके बाद इसे चलाया जाता है। इस बार दशहरे पर इस तोप का पूजन तो किया गया, लेकिन आचार संहिता की वजह से तोप तो नहीं चल सकी। हालांकि बड़ी शाला में रहने वाले साधुओं ने सांकेतिक रूप से तलवारबाजी की।

ग्वालियर के लक्ष्मी बाई कॉलोनी स्थित गंगादास की बड़ी शाला में प्रतिवर्ष दशहरा के मौके पर अकबर केशासन काल की लगभग 450 वर्ष पुरानी मिनी तोप की गूंज सुनाई देती थी, लेकिन इस बार ग्वालियर विधानसभा के उपचुनाव के कारण तोप की गूंज नहीं सुनाई दी।

1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के दौरान महंत गंगा दास जी महाराज और उनके साथ के संतो ने महारानी लक्ष्मीबाई की सहायता के लिए अंग्रेजों के खिलाफ इस तोप से गोले बरसाए थे। संग्राम में लगभग दो हजार साधुओं ने भाग लेकर अपने हथियार तलवार,भाला,गुप्ती और पटा के साथ ही इस तोप का भी उपयोग किया था।

इस संग्राम में 745 साधुओं ने लक्ष्मीबाई की रक्षा करते हुए अंग्रेजों से युद्ध करके अपने प्राणों की आहुति दी थी। आज भी यह तोप उस समय की याद दिलाती है। वर्तमान में शाला के महंत रामसेवक दास महाराज ने शस्त्रों के साथ ही तोप का पूजन किया गया।

Posted By: anil.tomar

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