अजय उपाध्याय, ग्वालियर। विजया राजे कृषि महाविद्यालय के कृषि वैज्ञानिकों ने हरे चने की वैरायटी तैयार की है। चने की वैरायटी तैयार करने में वैज्ञानिकों को करीब 10 साल का समय लगा। इस वैरायटी से किसानों की आमदनी चार गुना बढ़ेगी और लोग हर मौसम में हरे चने का स्वाद भी ले सकेंगे। इसके बीज का नोटीफिकेशन हो चुका है, अब जल्द ही इसकी वैरायटी किसानों के बीच पहुंचेगी। प्रदेश के किसान हरे चने की पैदावार कर पूरे देश की डिमांड की पूर्ति कर सकेंगे।

चने की वैरायटी तैयार करने में 10 साल लगे

कृषि महाविद्यालय के कई स्थानों पर रिसर्च सेंटर है। चने का रिसर्च सेंटर सीहोर में है, जहां पर चने की वैरायटी तैयार करने का काम वैज्ञानिक करते हैं। वैज्ञानिक मोहम्मद यासीन का कहना है कि ग्रीन चने की वैरायटी को तैयार करने में करीब दस साल का समय लगा है। ग्रीन चने की फसल रवि मौसम में तैयार की जा सकेगी। अक्टूबर से मार्च के बीच में फसल की बोवनी होगी। इसके 110 दिन के बीच में फसल तैयार हो जाएगी।

किसानों को होगा चार गुना फायदा

इस वैरायटी से किसानों की आय में चार गुना वृद्धि होगी। चने की औसत पैदावार 6 क्विंटल प्रति हेक्टेयर थी, लेकिन कृषि वैज्ञानिक यासीन के अनुसार इसकी पैदावार अब प्रति हेक्टेयर करीब 25 क्विंटल से भी अधिक हो सकती है। डिमांड और पैदावार बढ़ने से किसानों की आय भी चार गुना बढ़ जाएगी।

अन्य चनों से किस तरह अलग है

चने की करीब 20 हजार वैरायटी हैं। इसमें कृषि महाविद्यालय के सीहोर स्थित रिसर्च सेंटर में 5 हजार से अधिक वैरायटियों का कलेक्शन है। इन सब में ग्रीन चना कुछ अलग पहचान रखता है। फसल के समय जो ग्रीन चने का स्वाद है लगभग उसी तरह का स्वाद सूखने के बाद भी रहेगा। इस कारण डिमांड भी अच्छी रहेगी।

पूरे साल मिलेगा हरा चना

ग्रीन चने की वैरायटी तैयार की जा चुकी है। रवि मौसम में तैयार होने वाली फसल की उत्पादकता भी अच्छी है। इससे किसानों की आय बढ़ेगी, वहीं लोग पूरे साल इसका स्वाद ले सकेंगे। इसकी डिमांड देश-विदेशों तक होगी। सीजन से पहले किसानों को बीज मिल जाएगा।

डॉ. मोम्मद यासीन, कृषि वैज्ञानिक रिसर्च सेंटर सीहोर

Posted By: Hemant Upadhyay