ग्वालियर (नईदुनया प्रतिनिधि) नगर में चर्तुमास कर रही है प्रथम गणिनी आर्यिका विशुद्धमति माताजी व गणिनी आर्यिका विज्ञमति माताजी के सानिध्य में 15 दिवसीय अखंड णमोकार का पाठ भक्तिभाव व श्रद्धाभाव के साथ किया जा रहा है। णमोकार पाठ के पांचवें दिन गुरुवार को तीन सौ से अधिक महिला पुरूष गांजे-बाजे के साथ णमोकार पाठ करने के लिए कार्यक्रम स्थल पहुंचे। महिलाओं के साथ पुरूष भी पांरपरिक भारतीय वेशभूषा में सज-धज कर आए थे। इन महिलाओं ने भक्ति नृत्य करते हुए परिसर में प्रवेश किया। उसके उपरांत विधि-विधान के साथ माताजी के सानिध्य में भक्तिरस में डूब कर णमोकार का पाठ किया। माता श्री विज्ञमति ने णमोकार मंत्र के एक शब्द की व्याख्या करते हुए उसका भावार्थ भी समझाया। जैन समाज के प्रवक्ता ललित जैन ने बताया कि णमोकार पाठ में काफी संख्या जैन मतावलंबी भाग ले रहे हैं।

मंत्रों के उच्चारण के साथ भावार्थ को भी समझें

इस पावन अवसर पर विज्ञमति माताजी ने कहा कि मंत्रो का उच्चारण करने पर उच्चरण मात्रा शब्दों तक सीमित नहीं होना चाहिए। जब तक मंत्र के भावार्थ नहीं समझोगे, तब तक अंतरंग से भाव उत्पन्न नहीं होंगे। मेरी बात का अर्थ है कि कोई भी स्तूति पूजन या मंत्र का मात्र उच्चारण करने के साथ अंतरंग से वैसे ही भाव प्रकट होने चाहिये। तभी उसका पूर्णत: फल मिलता है। उन्होंने कहा कि न जाने कितने जन्मों के पुण्य अर्जन करने के बाद यह जीवन मिलता है। इस जीवन के अमूल्य समय को सांसरिक विषयों में व्यर्थ मत करो। जो समय हाथ से निकल गया है, फिर से वापिस आने वाला नहीं हैं। अपने जीवन का लक्ष्य बनाओ और उस लक्ष्य के पथ पर अग्रसर हो जाओ। तभी यह जीवन सही मायनों में साथर्क होगा। और इसका सुफल मिलेगा।

Posted By: anil tomar

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