- पूज्य माताजी की पिच्छिका से बांधी 21 फीट की राखी

ग्वालियर.नईदुनिया प्रतिनिधि। वैसे तो रक्षाबंधन का पर्व भाई बहिन का माना जाता है लेकिन जैन सिदांत के अनुसार पूर्व में आज के दिन हस्तिनापुर में विराजित 700 मुनिराजों के प्राणों पर घोर संकट आया था तब विष्णुकुमार मुनिराज ने उन मुनियों के प्राणों की रक्षा की थी तब से ही जैन परम्परा में यह पर्व रक्षा संकल्प के रूप में मनाया जाता है। यह पर्व हमें अपने धर्म अपने गुरुजनों और अपनों की रक्षा करने की प्रेरणा देता है। यह बात आज रक्षाबंधन पर्व के अवसर पर आयोजित धर्मसभा में पूज्य गणिनी आर्यिका विशुद्वमति माताजी की शिष्या गणिनी आर्यिका विज्ञमति माताजी ने कही। माताजी ने कहा कि हमारी श्रृदा का पात्र बड़ा ही कोमल और नाजुक होता है, जरा सी चोट से श्रृदा खंडित हो जाती है। तुम अपने ईश्वर, अपने गुरूओं के प्रति श्रृदा का मजबूत बनाओ। क्योकि श्रृदा और समर्पण से हमारी भक्ति का मार्ग प्रशस्त होता है। माताजी की पिच्छिका को बांधी 21 फीट की राखी।

माताजी की पिच्छिका को बांधी 21 फीट की राखी - आज रक्षाबंधन के पर्व पर निर्मल जैन साधना जैन मारसंस एवं अमित जैन, सीए रश्मि जैन ने माताजी की पिच्छिका पर स्वर्ण राखी बांधी, वहां मौजूद महिलाओं ने भी चांदी की राखी बांधकर माताजी से आशीर्वाद लिया। वहीं अरूणा कासलीवाल, राखी सोनी, विनीता पाटोदी, सुनीता पाटोदी के द्वारा बनाई गई 21 फीट की राखी माताजी की पिच्छिका से चातुर्मास के संयोजक पुरूषोत्तम जैन, विनय कासलीवाल, बालचंद जैन, मनोज सेठी, पंकज छावड़ा, सुरेन्द्र जैन वैक्सीन, पंकज बाकलीवाल, आशीष जैन, विनोद जैन मसालेवाले, धर्मचंद वरैया, अजीत वरैया, अजीत कासलीवाल, संजय गोधा, महेश जैन, नीरज छावड़ा, सचिन जैन मुरार, अनिल पाटोदी, नीरज पांडया, भानू जैन, एवं प्रवक्ता ललित जैन ने बांधी।

Posted By: anil tomar

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