ग्वालियर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। हाई कोर्ट की युगल पीठ में गुरुवार को नर्सिंग कालेज के उस मामले की सुनवाई होगी, जिसमें नर्सिंग कालेजों ने विद्यार्थियों की परीक्षा कराकर रिजल्ट घोषित करने की मांग की है। मध्य प्रदेश नर्सिंग काउंसिल को कालेजों की दी मान्यता की जानकारी पेश करनी होगी। किन-किन आधारों पर कालेजों को मान्यता दी गई है।

सत्र 2019-20 में अंचल की नर्सिंग कालेजों में एमएसी व पोस्ट बेसिक बीएससी नर्सिंग में प्रवेश हुए थे। जिन विद्यार्थियों ने समय पर प्रवेश लिया, उनके दस्तावेज कालेजों ने मेडिकल विश्वविद्यालय दस्तावेज भेज दिए। जब इस सत्र की परीक्षा का समय आया तो कोविड-19 का संक्रमण आ गया। जनरल प्रमोशन के आधार पर पास किया गया। इसी बीच मेडिकल यूनिवर्सिटी ने एसे विद्यार्थियों के लिए लिंक खोली की कि जो एनरोल हो चुके हैं। वह अपने दस्तावेजों की पूर्ति कर सकते हैं। लिंक खुलने पर कालेजों ने नए विद्यार्थी जोड़ दिए। जिनकी सीटें खाली थी, उन्हें भर लिया। यह मामला विश्वविद्यालय के संज्ञान में अाया जो विद्यार्थी नए जोड़ गए थे, उनकी जांच की तो कई गड़बड़ी मिली। बढ़े हुए विद्यार्थियों को एनरोल करने से मना कर दिया। 36 कालेजों ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की है। इन कालेजों में करीब 400 विद्यार्थी के प्रवेश हुए थे, जिनका प्रवेश पर विवाद चल रहा है। कोर्ट ने मूल रिकार्ड तलब किया था। इन कालेज के विद्यार्थियों का मूल रिकार्ड पेशकर दिया। अब कोर्ट ने कुलपति व कुलसचिवों की जानकारी मांगी है। अब नामांकन की जानकारी मांगी है।चरक इंस्टीट्यूट व नर्सिंग कालेज सहित 36 कालेजों ने याचिकाएं दायर की हैं। सभी याचिकाओं को हाई कोर्ट में एक साथ सुना जा रहा है।

ज्ञात हेै कि कोर्ट ने 2019-20 के प्रवेश सत्र की जानकारी मांगी थी। प्रवेश कब तक होने थे और प्रवेश की तारीख कितनी बार बढाई। प्रवेश से जुड़ा पूरा रिकार्ड गत दिवस पेस किया गया।

Posted By: anil tomar

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