ग्वालियर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। नगर निगम में आउटसोर्स घपले की जांच की खानापूर्ति के बाद कर्मचारियों की परेड का आदेश निकालने के बाद अधिकारियों ने वापस ले लिया। इन कर्मचारियों की निगम मुख्यालय में शनिवार की सुबह 10 बजे परेड कराने का आदेश जारी किया गया था, लेकिन शुक्रवार की शाम को अचानक ही इस निर्णय को रद कर दिया गया। निगम अधिकारियों का तर्क है कि कर्मचारियों की भीड़ इकट्ठा करने के बजाय अब निगम के विभागों में पदस्थ आउटसोर्स कर्मचारियों की विभागवार सूची तैयार की जाएगी। इसके बाद उन्हें अलग-अलग दिनों में विभागवार परेड के लिए बुलाया जाएगा।

नगर निगम के अपर आयुक्त मुकुल गुप्ता ने शुक्रवार को सभी विभागाधिकारियों और क्षेत्रीय अधिकारियों को पत्र लिखकर आदेशित किया था कि सफाई कार्य में संलग्न श्रमिकों को छोड़कर विभागों और क्षेत्रीय कार्यालयों में पदस्थ आउटसोर्स कर्मचारियों को शनिवार की सुबह निगम मुख्यालय में उपस्थित रहने के लिए कहा जाए। हालांकि इस पत्र को लेकर भी गफलत की स्थिति उत्पन्न हो गई। जारी आदेश में आयुक्त के पदनाम का उल्लेख था, लेकिन हस्ताक्षर अपर आयुक्त के थे। बाद में आयुक्त के पदनाम के आगे अपर लिख दिया गया और इसे निगमायुक्त द्वारा आदेशित बताया गया। पत्र पहुंचने के बाद सभी विभागों में हड़कंप मच गया। इसके बाद अधिकारियों ने इस आदेश को वापस ले लिया। अपर आयुक्त मुकुल गुप्ता का कहना है कि सामान्य प्रशासन विभाग के पास विभागवार कर्मचारियों की जानकारी उपलब्ध नहीं है। इस कारण इस जानकारी को विभागवार तैयार कराया जा रहा है। इसके बाद प्रत्येक विभागों में पदस्थ कर्मचारियों को बुलाकर उनकी परेड कराई जाएगी। देर रात तक सामान्य प्रशासन विभाग में कर्मचारी यह जानकारी तैयार करते नजर आए।

-उपस्थित नहीं होते सभी कर्मचारी-

नगर निगम के अफसरों ने आनन-फानन में सभी कर्मचारियों की परेड का आदेश तो जारी कर दिया, लेकिन असल में इनमें से कई कर्मचारी शहर में पदस्थ अफसरों की निजी सेवा में कार्यरत हैं। इसके अलावा कई कर्मचारी सिर्फ कागजों में पदस्थ हैं और कार्यालयों में काम ही नहीं करते हैं। ऐसे में यदि परेड होती भी, तो सभी कर्मचारी उपस्थित होते ही नहीं। इसके अलावा परेड का आदेश मिलने के बाद अधिकारियों पर राजनैतिक और प्रशासनिक दबाव भी पड़ने लगा। इसके कारण इस आदेश को होल्ड कर दिया गया।

-गिनती 61 की, नाम 58 के-

आउटसोर्स घपले की जांच के बाद राज सिक्योरिटी एजेंसी द्वारा 61 कर्मचारियों को बिना मांग के प्रतिस्थापित करने की बात कही गई थी। उन्हें राज सिक्योरिटी एजेंसी को वापस करने का बिंदु था, लेकिन जब इन कर्मचारियों की सूची जारी हुई तो उसमें कुल 58 कर्मचारियों के नाम ही लिखे हुए थे। इनमें पीएचई में पदस्थ 40 कुशल कर्मचारी, कार्यशाला में कार्यरत 13 कर्मचारी सहित क्षेत्रीय कार्यालयों और सामान्य प्रशासन विभाग के कर्मचारी शामिल हैं। इनमें अधिकतर कर्मचारी ऐसे हैं, जो राजनैतिक लोगों और खुद नगर निगम के अधिकारियों के रिश्तेदार हैं।

ये हैं बड़े सवाल?

-जांच का दायरा घटाकर सिर्फ सात अप्रैल 2022 से लेकर वर्तमान किया गया है। किस आधार पर सिर्फ अप्रैल तक का कट आफ लिया गया?

-जांच रिपोर्ट में सिर्फ 61 कर्मचारियों की सेवाएं वापस करने का हवाला है। इन्हें किसने और किस आधार पर नौकरी पर रखा?

-सस्पेंड किए गए सहायक यंत्री विष्णु पाल और विशाल जाटव के मामले में किसी निष्कर्ष का उल्लेख नहीं है?

-विष्णु पाल पर 31 कर्मचारी रखने का आरोप पर उसके वेतन से वसूली की नोटशीट चली, लेकिन फिर कोई कार्रवाई क्यों नहीं हुई?

Posted By: anil tomar

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