-जेयू ने चार कालेजों की मान्यता खत्म करने पहले लिया है कानूनी अभिमत

ग्वालियर (नईदुनिया प्रतिनिधि)।जीवाजी विश्वविद्यालय को उन चार कालेजों की मान्यता समाप्त करने के लिए कानूनी अभिमत मिल गया है, जिनकी उच्च शिक्षा विभाग ने मान्यता समाप्त कर विद्यार्थियों को दूसरे कालेज में हस्तांतरित करने का आदेश दिया था। कानूनी अभिमत में कहा गया है कि 15 दिन का नोटिस देकर कालेजों का पक्ष सुना जाए। उसके बाद मान्यता समाप्त कर सकते हैं। विश्वविद्यालय को आडिनेंस 27 क्लाज 10 व 11 में अधिकार दिए हैं। अब जेयू इस पूरे मामले को 14 अक्टूबर को होने वाली कार्य परिषद की बैठक में लेकर जाने वाली है। कार्य परिषद में फैसला लिया जाएगा।

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने चार कालेजों को मान्यता दिए जाने को लेकर हंगामा किया था। एबीवीपी का अारोप था कि कालेजों को मान्यता देने में अनदेखी की गई है। इनके पास सुविधाएं नहीं है। हंगामे के बाद जेयू ने राधाकृष्ण कालेज दतिया, श्री रामराजा शिक्षा महाविद्यालय दतिया, कराहल एजुकेशन कालेज बरौआ, आइडियल कालेज मेहंगाव का फिर से निरीक्षण किया गया। इन कालेजों के पास शिक्षक, भूमि, भवन आदि नहीं थे। कागजों में ही कालेजों को पास सुविधाएं थी। निरीक्षण रिपोर्ट रिपोर्ट आने के बाद मामला उच्च शिक्षा विभाग को भेज दिया था। कालेजों की मान्यता पर उच्च शिक्षा विभाग को फैसला लेना था। 24 अगस्त को उच्च शिक्षा अायुक्त दीपक सिंह ने जेयू के कुलसचिव को कार्रवाई के लिए पत्र जारी किया। चार अशासकीय कालेजों के पास भूमि, भवन व शिक्षक नहीं है। इनकी मान्यता खत्म की जाए। इन कालेजों में जो विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। उन्हें पास के कालेज में स्थानांतरित किया जाए। उच्च शिक्षा विभाग के पत्र को जेयू की स्थायी समिति में रखा गया। स्थायी समिति ने मान्यता खत्म करने वजाए कानूनी अभिमत लेना उचित समझा। अपने विधिक सलाहकार दीपक खोत से जेयू ने अभिमत लिया।

इतने विद्यार्थी करने पड़ेंगे हस्तांतरित

- कराहल एजूकेशन कालेज बरौआ, राधाकृष्ण कालेज दतिया, श्रीरामराज शिक्षा महाविद्यालय दतिया, आडियल कालेज मेहगांव में भूमि व भवन मानकों के अनुसार नहीं है। इन कालेजों में 446 विद्यार्थी हैं, जिन्हें ट्रांसफर करना होगा।

- यदि विद्यार्थी ट्रांसफर किए जाते हैं तो फीस समायोजन में दिक्कत अाएगी, क्योंकि विद्यार्थी फीस जमा कर चुके हैं।

इनका कहना है

- कार्य परिषद की बैठक में पूरे मामले रखने जा रहे हैं। अब पक्ष सुनने की जरूरत नहीं है। क्योंकि उच्च शिक्षा विभाग ने कालेजों का पक्ष सुना था। उसके बाद कार्रवाई का आदेश दिया था।

प्रो अविनाश तिवारी, कुलपति जेयू

Posted By: anil tomar

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