ग्वालियर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। मध्य भारत प्रांत के संघसंचालक अशोक पांडे, प्रांत सहकार्यवाह हेमंत सेठिया व प्रांत प्रचार प्रमुख ओमप्रकाश सिसौदिया ने गुरुवार को स्वर साधक संगम (घोष शिविर) के संबंध में पत्रकारों से चर्चा करते हुए कहा कि जीवन के संस्कारों में संगीत का विशेष महत्व है। आरएसएस ने इसे संगठन गढ़ने का मूलमंत्र माना है। स्वयं सेवकों के कदम से कदम मिलाकर चलने की प्रेरणा घोष द्वारा दी जाती है। सरस्वती शिशु मंदिर केदारपुर में घोष शिविर प्रदर्शनी के उद्धाटन के साथ हुआ। इसी क्रम में 26 नवंबर शिविर के घोष वादकों का पथ संचलन शहर में निकलेगा। पथ संचलन रानी लक्ष्मीबाई की समाधि स्थल से प्रारंभ होकर जीवायएमसी मैदान में समाप्त होगा। घोष शिविर में 28 नवंबर को सरसंघसंचालक डा. मोहन भागवत का मार्गदर्शन प्राप्त होगा।

प्रांत संघसंचालक अशोक पांडे ने बताया कि संघ में घोष की यात्रा 1927 से प्रारंभ हुई। प्रारंभ में शंख, वंशी और आनक जैसे मूल वाद्याें पर वादन शुरू हुआ। संघ के स्वंयसेवकों द्वारा अपने अथक प्रयासों से शास्त्रीय रागाें के आधार पर रचनाओं का निमार्ण किया गया। आज लगभग साठ से अधिक रचनाओं का वादन संघ में हो रहा है। उन्होंने बताया कि 1982 के एशियार्ड खेलों में शिवराज भूप रचना का वादन हुआ था। इसका निमार्ण संघ के कार्यकर्ताओ ने किया है। मध्यभारत प्रांत में घोष का इतिहास काफी पुराना है। वर्तमान में अनेक कार्यकर्ता घोष के विविध वाद्याें का वादन कुशलता पूर्वक कर रहे है। मध्यभारत प्रांत में घोष के अच्छे वादक तैयार हाे, इस निमित्त स्वर साधक संगम घोष शिविर यहां आयोजित किया गया है।

500 घोष वादक शामिल होंगे

इस शिविर में लगभग 500 घोष वादक, शिविर प्रमुख पांच रचनाओं का प्रदर्शन प्रमुखता से किया जाएगा। इनमें ध्वजारोपणम, मीरा, भूप, शिवरंजनी एवं तिलंग है। 26 नवंबर को शाम चार बजकर 45 मिनट पर शिविर के घोष वादकाें ने पथ संचलन का कार्यक्रम रखा है। यह संचलन महारानी लक्ष्मीबाई की समाधी स्थल से प्रारंभ होकर फूलबाग, गुरुद्वारा, नदीगेट, इंदरगंज चौराहा होते हुए जीवायएमसी मैदान पहुंचेगा।

डा. मोहन भागव का मार्गदर्शन शनिवार को

28 नवंबर को शिविर स्थल केदारधाम में प्रात्यक्षिक सायं 04:30 बजे होगा। इसमें घोष वादकांे द्वारा व्यूह रचनाओं के माध्यम से उत्कृष्ठ वादन किया जाएगा। कार्यक्रम के अंत में सरसंघचालक डा. मोहन भागवत का मार्गदर्शन प्राप्त होगा।

Posted By: anil.tomar

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