ग्वालियर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। जयारोग्य अस्पताल की ओपीडी में सोमवार को मरीज व स्टाफ के बीच विवाद हो गया। विवाद इतना बढ़ा कि मरीज ने गुस्से में आकर स्टाफ के साथ मारपीट कर दी। हालांकि बाद में मरीज को पकड़ लिया गया पर उसकी हालत को देखते हुए उसे जाने दिया। असल में जेएएच की ओपीडी में चर्मरोग विभाग में उपचार के लिए बिरला नगर से जिलेदार सिंह दिखाने के लिए पहुंचे थे। ़मिरीज जिलेदार ने ओपीडी से पर्चा कटवाकर 27 नंबर कक्ष में पर्चा जल्द चढ़ाने के लिए कहा। इसी बात को लेकर वहां पर तैनात स्टाफ ओमेंद्र सिंह से विवाद हो गया। ओमेंद्र का कहना था कि पंक्ति में लगें, जब कि जिलेदार बीच में ही अपना पर्चा चढ़वाना चाहता था। इसे लेकर बहस बढ़ गई और जिलेदार ओमेंद्र के साथ मारपीट कर भाग निकला। हालांकि मरीज को पकड़कर पुलिस में शिकायत भी करानी चाही पर उसकी हालत देखकर जाने दिया गया।

दो चिटफंडी कारोबारियों को छह-छह साल की सजा, लगाया जुर्माना

अपर सत्र न्यायालय ने चिटफंड कारोबारी सुरेंद्र सिंह व मुकेश सिहं को छह-छह साल की सजा सुनाई है। साथ ही तीन-तीन हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। कोर्ट ने आरोपितों को सजा काटने के लिए जेल भेज दिया। खेमचंद्र व सगुनाबाई ने दो जून 2011 के कलेक्ट्रेट में आवेदन दिया कि बीपीएन स्टेट एंड एलाइड लिमिटेड पैसे निवेश किए थे। उन्होंने धन दुगना करने का लालच दिया। जब पैसे वापस मांगे तो नहीं दिए। उनकी शिकायत पर थाटीपुर थाने में एफआइआर दर्ज की गई। पुलिस ने आठ लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया। जिसमें ट्रायल के दौरान छह फरार हो गए। मुकेश व सुरेंद्र ने ट्रायलका सामना किया। कोर्ट ने दोनों के सजा सुनाई।

कमेटी की जानकारी देने दो सप्ताह का समय दिया

हाई कोर्ट की युगल पीठ ने शहर में महिला सुरक्षा की जांच की कमेटी को जानकारी देने दो सप्ताह का समय दिया है। सोमवार को हुई सुनवाई के दौरान शासन की ओर से कमेटी की जानकारी नहीं दी गई, जिसके चलते कोर्ट ने नाराजगी जताई। ़हिाई कोर्ट में 2019 में महिला सुरक्षा को लेकर जनहित याचिका लंबित है। कोर्ट के आदेश पर महिला वकीलों की कमेटी ने शहर के सार्वजनिक स्थानों पर महिला सुरक्षा की जांच की और एक रिपोर्ट पेश की। इस रिपोर्ट में बताया गया कि स्ट्रीट लाइट बंद है। कैमरे भी चालू नहीं है। पार्क, बस स्टैंड सहित अन्य सार्जनिक स्थानों पर महिलाओं की सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं हैं। इस रिपोर्ट के बाद कोर्ट ने एक संयुक्त कमेटी बनाने का आदेश दिया, जिसमें महिला वकील, पुलिस, नगर निगम, प्रशासन के अधिकारी मौजूद रहेंगे, लेकिन हर बार शासन की ओर से समय लिया जा रहा है। कमेटी की जानकारी नहीं दी जा रही है। इसके चलते कोर्ट ने सख्ती दिखाई है।

Posted By: anil tomar

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