विकास पांडे, ग्वालियर (नईदुनिया)। सीएए-एनआरसी को लेकर लोगों में फैला भ्रम अब आर्थिक गणना के काम में रुकावट बन गया है। ग्वालियर-चंबल संभाग के जिलों में मुस्लिम बस्तियों में सर्वेयरों को जानकारी न देने या भगाने के मामले सामने आ रहे हैं। हाल ये है कि ग्वालियर में ही बीते एक माह में तीन इलाकों में गणना के लिए गए कर्मचारी पिटते-पिटते बचे। पुलिस ने सर्वेयरों को बचाया। श्योपुर, शिवपुरी में भी गणना करने पहुंचे कर्मचारियों को भगाने की घटनाएं सामने आई हैं। डरे सहमे कर्मचारी अब आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं या क्षेत्रीय पार्षदों के सहयोग से घरों में पहुंचकर जानकारी जुटा रहे हैं, क्योंकि इनको लोग पहचानते हैं और जानकारी देने में घबराते नहीं है। वहीं, श्योपुर में कलेक्टर ने जागरुकता कार्यक्रम चलाने की बात कही है। सर्वे करने वाली कंपनी के अफसरों के मुताबिक मुस्लिम बस्तियों में सबसे ज्यादा दिक्कत आ रही है।

इसी माह पूरा होना है सर्वे का काम : ग्वालियर में 5 लाख 14 हजार लोगों की आर्थिक गणना होना है। सितंबर 2019 में काम शुरु हुआ था और फरवरी 2020 तक इसे पूरा होना है। सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय ने आर्थिक गणना का काम सीएससी (कॉमन सर्विस सेंटर) ई गवर्नेंस सर्विस इंडिया लिमिटेड को सौंपी है। ग्वालियर में सीएससी कंपनी ने सांख्यिकी विभाग को अवगत करा दिया है कि ऐसे मामलों से आर्थिक गणना के कार्य की रफ्तार काफी धीमी हो चुकी है।

ये मामले सामने आए

नदी पार टाल मुरार में टीम ने जैसे ही जानकारी लेना शुरू किया तो लोगों ने यह कहते हुए घेर उन्हें लिया कि तुम जानकारी ले जाओगे फिर हमें देश से निकाल दोगे। जब मारपीट की स्थिति बन गई तो टीम ने जिला प्रबंधक को फोन लगाया, वह कर्मचारियों के सभी दस्तावेज एवं पुलिस को साथ लेकर पहुंचे। तब कर्मचारियों को भीड़ के बीच से निकाला जा सका। न गेंडेवाली सड़क इलाके में टीम को लोगों ने घेर लिया था। अफसरों को फोन तक नहीं लगाने दे रहे थे। हंगामे की सूचना पर स्थानीय पार्षद मौके पर पहुंच गए। लोगों को समझा बुझाकर कर्मचारियों को बाहर निकाला गया। न हजीरा क्षेत्र स्थित मुस्लिम बस्ती में कर्मचारियों को ऐसे ही विरोध का सामना करना पड़ा था। यहां पर तो टीम को लोगों ने भगा दिया था।

यह सवाल उलझा रहे

परिवार के सदस्य यदि अलग-अलग रहते हैं तो उनकी अलग आर्थिक गणना होगी। सामूहिक होने पर पिता को मुखिया मानते हुए गणना की जाएगी। हालांकि इसमें यह देखा जाएगा कि वह कम से कम तीन माह से निवास कर रहा हो या अगले 3 माह तक रहना उसका तय हो। आर्थिक गणना में आवासीय के लिए 5-7 सवाल हैं, जबकि कमर्शियल में करीब 20 सवाल रखे गए हैं। यह गणना मोबाइल के माध्यम से की जा रही है। इसलिए भी लोग सर्वेयरों पर अविश्वास जता रहे हैं। लोगों यह भी पूछते हैं कि जब जनगणना 2021 में होनी है तो फिर 2020 में यह कौनसी जनगणना की जा रही है।

मुस्लिम बस्तियों में जानकारी जुटाने में काफी दिक्कतें आ रही है। तीन बार तो टीम को घेर लिया था, बड़ी मुश्किल से पुलिस की मदद से बाहर निकाला गया। हमने सांख्यिकी विभाग एवं प्रशासन को अवगत करा दिया है। - अभिनंदन त्यागी जिला प्रबंधक सीएससी कंपनी, ग्वालियर

आर्थिक आकलन जनहितैषी योजना है। भारत के हर नागरिक को सहयोग देना चाहिए। इसका लाभ सीधे जनता को ही मिलता है। मैं अपनी शनिवार को होने वाली सभा में भी लोगों से अपील करूंगा कि वह सरकार का सहयोग करें। ग्वालियर लौटने के बाद अभियान चलाएंगे, जिससे लोगों को आर्थिक गणना को लेकर जागरूक कर सकें। - एड. शीराज कुरैशी

पूर्व सदस्य मप्र राज्य हज कमेटी सांख्यिकी विभाग के सर्वेक्षण में इस तरह की शिकायत की जानकारी अभी नहीं मिली है। इसको लेकर संबंधित अधिकारियों से बात की जाएगी। - अनुराग चौधरी, कलेक्टर

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