Pitra Dosha, ग्वालियर, नईदुनिया प्रतिनिधि। जब सूर्य और राहू की युति हो रही हो तो यह माना जाता है कि पितृ दोष योग बन रहा है। ज्योतिषाचार्य सुनील चोपड़ा ने बताया कि शास्त्र के अनुसार सूर्य तथा राहू जिस भी भाव में बैठते है, उस भाव के सभी फल नष्ट हो जाते है। व्यक्ति की कुण्डली में एक ऎसा दोष है जो इन सब दु:खों को एक साथ देने की क्षमता रखता है, इस दोष को पितृ दोष के नाम से जाना जाता है। कुंडली सूर्य व राहु की युति बन रही हो या सूर्य राहु का दृष्टि संबद्ध हो तब भी पितृ दोष माना जाता है। यदि पितृ दोष का निवारण न किया जाए तो पीढ़ी दर पीढ़ी कुंडली मे बनता रहता है।

क्यों लगता है पितृ दोष क्या है कारण

पितरों का विधिवत अंतिम संस्कार और श्राद्ध न होना। पितरों की विस्मृति या अपमान करना। धर्म के विरुद्ध आचरण करना। पीपल, नीम और बरगद के पेड़ को कटवाना। नाग की हत्या करना या फिर किसी से करवाना। अगर किसी व्यक्ति की मृत्यु के बाद उसका विधि विधान से अंतिम संस्कार न किया गया हो, या फिर किसी की अकाल मृत्यु हो जाए तो उस व्यक्ति से जुड़े परिवार के लोगों को कई पीढ़ियों तक पितृ दोष का दंश झेलना पड़ता है।

कैसे जाने की पितृ दोष लगा है

पितृ दोष होने पर व्यक्ति के जीवन में संतान का सुख नहीं मिल पाता है। अगर मिलता भी है तो कई बार संतान विकलांग होती है, मंदबुद्धि होती है या फिर चरित्रहीन होती है या फिर कई बार बच्चे की पैदा होते ही मृत्यु हो जाती है। नौकरी और व्यवसाय में मेहनत करने के बावजूद भी हानि होती रहती है। परिवार में अक्सर कलह बने रहना या फिर एकता न होना। परिवार में शांति का अभाव। परिवार में किसी न किसी व्यक्ति का सदैव अस्वस्थ बने रहना। इलाज करवाने के बाद भी ठीक न हो पाना। परिवार में विवाह योग्य लोगों का विवाह न हो पाना। या फिर विवाह होने के बाद तलाक हो जाना या फिर अलगाव रहना। पितृदोष होने पर अपनों से ही अक्सर धोखा मिलता है। पितृदोष होने पर व्यक्ति बार-बार दुर्घटना का शिकार होता है। उसके जीवन में होने वाले मांगलिक कार्यों में बाधाएं आती हैं। परिवार के सदस्यों पर अक्सर किसी प्रेत बाधा का प्रभाव बना रहना। घर में अक्सर तनाव और क्लेश रहना।

पितृ दोष दूर करने के उपाय

कुंडली में पितृ दोष होने पर व्यक्ति को दक्षिण दिशा में पितरों की फोटो लगाकर उनको रोजाना माला चढ़ाकर उनका स्मरण करना चाहिए। पूर्वजों का आशीर्वाद मिलने के साथ ही पितृदोष के प्रभाव समाप्त होने लगेंगे। पूर्वजों के निधन की तिथि पर ब्राह्मणों को श्रृद्धापूर्वक भोजन करवाएं और यथाशक्ति दान भी करें। पितृ दोष की पूजा करवाएं घर के पास में लगे पीपल के पेड़ पर दोपहर में जल चढ़ाएं। पुष्प, अक्षत, दूध, गंगाजल और काले तिल भी चढ़ाएं। पितरजनों को याद करें। शाम के वक्त रोजाना दक्षिण दिशा में एक दीपक जरूर जलाएं। रोजाना नहीं जला सकते हैं तो कम से कम पितर पक्ष में जरूर जलाएं। अमावस पर किसी गरीब को भोजन करवाएं। कुंडली में पितृदोष दूर करने के लिए किसी गरीब कन्या का विवाह करने या फिर विवाह में मदद करने से भी आपको लाभ होता है।

Posted By: anil.tomar

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