- पितृ पक्षन कटोराताल के छोटे ताल में पितरों को किया तर्पण, छह अक्टूबर तक चलेंगे श्राद्घ

Pitru Paksha 2021: ग्वालियर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। पूर्वजों की आस्था यानी पितृ पक्ष सोमवार से शुरू हो गए हैं। पहले दिन शहरवासियों ने कटोराताल पहुंचकर अपने पितरों को तर्पण किया। कटोराताल के छोटे ताल को तर्पण के लिए इस दिन भर दिया गया। इससे पहले निर्माण कार्य के चलते यह खाली था। ज्योतिषाचार्यों का कहना है इस वर्ष कन्या राशि के सूर्य ने पितृपक्ष की महिमा को बढ़ाया है। पितृ पक्ष में यदि पूर्वजों को मन से याद किया जाए तो वे विविध दोषों को दूर करते हैं।़अिब छह अक्टूबर तक श्राद्घ किए जाएंगे, मगर श्राद्घ कर्म बिना विधि और बिना तिथि के नहीं करना चाहिए। इससे पितृ रुष्ट भी हो सकते हैं। ज्योतिषाचार्य सतीश सोनी ने बताया कि श्रद्घा से श्राद्घ शब्द बना है। श्राद्घ मुख्यत: दो तरह के होते है एकोदिष्ठ व पार्वण। ़आिश्विन माह के महालय पितृपक्ष में सोलह दिनों में पार्वण श्राद्घ किए जाते हैं। इसमें अपरा़ व्यापिनि तिथि श्राद्घ में ली जाती है, जिसे कुतुप बेला कहते है। श्राद्घ में दोहित्र नेपाली कंबल व कुतुप बेला ये श्रेष्ठ होते हैं। यत्न पूर्वक इन्हें काम में लेना चाहिए। आश्विन

कृष्ण पक्ष महालय पितृपक्ष के नाम से कहलाता है, लेकिन नाना-नानी के श्राद्घ के लिए नवरात्रि की प्रतिपदा को यह श्राद्घ होता है, जो आश्विन शुक्ला प्रतिपदा सात अक्टूबर गुरुवार को होगा। आश्विन मास में आने वाले महालय पितृ पक्ष में अपने दिवंगत पूर्वजों के निमित्त श्राद्घ कर्ता 20 सितंबर सोमवार से छह अक्टूबर के मध्य श्राद्घ कर सकेंगे। इस बार 27 सितंबर को कोई श्राद्घ नहीं है।़ िज्योतिषाचार्यों के अनुसार अगर कोई कुंवारा देवलोक हुआ हो तो उसका श्राद्घ पंचमी को किया जाता है। सुहागिन स्त्री देव लोक हुई हो तो उसका श्राद्घ नवमीं को किया जाता है। सन्यासियों का द्वादशी को व आत्मघात जल-अग्नि-विष व शस्त्र से मरण व्यक्ति का चतुर्दशी को श्राद्घ करना चाहिए।

Posted By: anil.tomar

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