Plasma Therapy for Coronavirus : ग्वालियर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। वेंटिलेटर पर बीमारी से लड़ रहे कोरोना पॉजिटव मरीज को प्लाज्मा थेरेपी का सहारा नहीं मिल सकेगा। क्योंकि माना जा रहा है कि प्लाज्मा उन्हीं मरीजों के काम आ सकता है, जिन्हें ऑक्सीजन की आवश्यकता है, वेंटिलेटर की नहीं। इसलिए प्लाज्मा थेरेपी उन मरीजों को दी जाएगी जो ऑक्सीजन ले रहे हैं। ऑक्सीजन पर मरीजों के शरीर में प्लाज्मा पहुंचाकर उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाई जाती है। इससे वह कोरोना संक्रमण से लड़कर उसे हरा सकें। हालांकि यह पद्धति कितनी कारगार साबित होगी, यह तो आने वाले वक्त में पता चलेगा। लेकिन संभावना जताई जा रही है प्लाज्मा थेरेपी से कोरोना मरीज को वेंटिलेटर पर पहुंचने से रोका जा सकेगा। पैथोलॉजी विभाग की प्रोफेसर डॉ. सुधा अयंगर का कहना है कि प्लाज्मा निकालने का काम सोमवार से शुरू किया जाएगा। दो माह पहले कोरोना पॉजिटिव पाए गए मेडिकल छात्र के शरीर से प्लाज्मा निकाला जाएगा।

प्लाज्मा निकालने के लिए जिस बैग का उपयोग होगा उसकी कीमत 8 हजार 200 रुपए है। 96 एंटीबॉडी किट की कीमत करीब 19 हजार रुपए है। एक मरीज को प्लाज्मा देने के लिए करीब 9 से 10 हजार रुपए का खर्च आएगा। यह सामान कॉलेज ने मंगवाया है। इसलिए इसका भुगतान मरीज करेगा या आयुष्मान योजना से होगा, यह तय करने प्रस्ताव तैयार कर डीन के माध्यम से कमिश्नर को भेजा गया है। हालांकि अभी कोरोना मरीजों का इलाज पूरी तरह नि:शुल्क किया जा रहा है।

मांग पर ही दी जाएगी प्लाज्मा थेरेपी

डॉ. सुधा अयंगर का कहना है कि कोरोना पॉजिटिव मरीज को प्लाज्मा दिया जा सकता है या नहीं, इसकी जानकारी इलाज दे रहे डॉक्टर बताएंगे। वह मरीज को इस बात की सलाह देंगे कि मरीज को प्लाज्मा थेरेपी से कितना सहयोग मिल सकेगा। तब मरीज के कहने पर उसे प्लाज्मा उपलब्ध करवाया जाएगा।

एक ब्लड ग्रुप की दो बैग प्लाज्मा तैयार रहेगा

अभी शुरुआत में एक ब्लड ग्रुप की दो बैग प्लाज्मा तैयार किया जाएगा। जिससे यदि प्लाज्मा थेरेपी की मांग की जाती है तो उसे प्लाज्मा उपलब्ध करवाया जा सके। लेकिन इसका ब्लड बैंक की तरह प्लाज्मा बैंक नहीं बनाया जाएगा। प्लाज्मा उन्हीं मरीजों के शरीर से निकाला जाएगा, जिन्हें स्वस्थ हुए 28 से अधिक और 120 दिन से कम समय हुआ है। उसका कारण है कि प्लाज्मा निकलने से लेकर एक बैग में रखने में करीब 9 हजार रुपए का खर्च आ रहा है। यदि इसकी मांग इतनी नहीं आई तो प्लाज्मा का कोई उपयोग नहीं है। ऐसे में स्वस्थ मरीज के शरीर से लिया गया प्लाज्मा और उपयोग किया गया बैग दोनों की बेकार चले जाएंगे।

रैपिड एंटिजन किट उपलब्ध, फिर भी जांच नहीं

जिला अस्पताल को रैपिड एंटिजन किट उपलब्ध हुए करीब 12 दिन हो चले हैं, लेकिन इस किट से कोरोना की जांच शुरू नहीं की जा सकी है। उधर ट्रूनेट मशीन पर भी जांच लगभग बंद हैं। इस मशीन पर अब इमरजेंसी में ही जांच की जा रही है। जबकि ट्रूनेट मशीन पर कोरोना की जांच रिपोर्ट आरटीपीसीआर से अच्छा है। उसके बाद भी इस पर जांच नहीं की जा रही है। इसके पीछे स्वास्थ्य विभाग के अफसरों का कहना है कि किट उपलब्ध नहीं है, हालांकि एक हजार रैपिड किट उपलब्ध हैं।

मेडिकल छात्र के शरीर से ही प्लाज्मा निकालकर इसकी शुरुआत करेंगे। अभी एक ब्लड ग्रुप के दो बैग ही तैयार करेंगे। इसके शुल्क को लेकर प्रस्ताव भेजा गया है। मांग के अनुरूप ही प्लाज्मा उपलब्ध करवाया जाएगा। डॉ. सुधा अयंगर, प्रोफेसर पैथौलॉजी विभाग जीआरएमसी

Posted By: Nai Dunia News Network

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