ग्वालियर. नईदुनिया प्रतिनिधि। श्रावण शुक्ल पक्ष की एकादशी को पुत्रदा एकादशी भी कहा जाता है।इस व्रत को करने से नि:संतान दम्पतियों की संतान की कामना पूर्ण होती है।पुत्रदा एकादशी का व्रत वर्ष मे दो बार रखा जाता है.प्रथम पुत्रदा एकादशी पौष माह की शुक्ल पक्ष की एकादशी एवं द्वितीय श्रावण मास की शुक्ल एकादशी ।इस वर्ष श्रावण मास की पुत्रदा एकादशी सोमवार दिनांक 08 अगस्त 2022 को मनाई जाऐगी।ऐसे दम्पत्ति जिन्हें कोई संतान नही है उन्हें यह व्रत अवश्य करना चाहिए मान्यता है कि इस व्रत को करने से भगवान विष्णु की विशेष कृपा एवं आशिर्वाद प्राप्त होता है एवं संतान की प्राप्ति होती है।वैसे तो सभी एकादशी का व्रत करने से भगवान विष्णु की विशेष क।पा प्राप्त होती है फिर भी पुत्रदा एकादशी का अपना महत्व है।

पूजा हेतु धूप दीप पुष्प अक्षत रोली और नैवेद्य एवं तुलसी दल।तुलसी के बिना भगवान विष्णु की पूजा अधूरी मानी जाती है।इस दिन दीपदान का भी विशेष महत्व है।दीपदान हेतु आटे के दीपक बनाकर बरगद या पीपल के पत्ते अथवा दोने मे रखकर किसी नदी या तालाब मे प्रवाहित करें नदी ना होने की दशा मे पीपल या बरगद या तुलसी के नीचे भी दीप जलाया जा सकता है।

पुत्रदा एकादशी साल में दो बार मनाई जाती है

एक पौष शुक्ल पक्ष में और दूसरी श्रावण शुक्ल पक्ष में। कहा जाता है कि जो दम्पति इस व्रत को करते हैं उन्हें संतान की प्राप्ति होती है।मनाई गई 24 एकादशियों में से प्रत्येक का एक विशिष्ट लक्ष्य होता है। श्रावण पुत्रदा एकादशी में निःसंतान दंपत्ति को संतान की प्राप्ति करने की शक्ति होती है। श्रावण पुत्रदा एकादशी और पौष पुत्रदा एकादशी 'पुत्रों के दाता' हैं। श्रावण पुत्रदा एकादशी का महत्व 'भविष्य पुराण' में राजा युधिष्ठिर और भगवान कृष्ण के बीच चर्चा के रूप में वर्णित है। भगवान कृष्ण ने इस व्रत को करने के अनुष्ठान और लाभों के बारे में बताया है। एक पुरुष संतान के साथ धन्य होने के अलावा, भक्त अपने पापों को धोने और मोक्ष प्राप्त करने के लिए श्रावण पुत्रदा एकादशी का पालन करते हैं।

एकादशी तिथि आरम्भ

रविवार 07अगस्त रात्रि 23:50बजे से

तिथि समाप्त सोमवार 08अगस्त रात्रि 21:00 बजे तक

Posted By: anil tomar

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