Radha Ashtami 2021: ग्वालियर, नईदुनिया प्रतिनिधि। आगे-आगे राधा और पीछे-पीछे भगवान चक्रधर। जुबां पर राधे-राधे रटा करो, कृष्ण नाम रस पिया करो...। नजारा था सनातन धर्म मंदिर का, जहां मंगलवार को सांझ ढलते ही राधा अष्टमी पर भक्ति के रंग उड़ते हुए आए। इस रंग में मौके पर मौजूद सभी भक्त डूबे हुए थे। इस दिन सुबह से ही मंदिर में कार्यक्रम शुरू हो गए थे। सर्वप्रथम पालकी यात्रा निकाली गई। इसके बाद राधा जी का प्राकट्योत्सव हुआ। तत्पश्चात परंपरागत दधिकांदा उत्सव, मंगल बधाई गान गाए गए।़मिुख्य पुजारी पं.रमाकांत शास्त्री ने भगवान श्री चक्रधर का श्रीराधाजी के रूप में परंपरानुसार प्रतिकात्मक 56 कली का लहंगा पहनाकर भव्य श्रृंगार किया। शाम के समय राधा जी के डोल की प्रतीकात्मक शोभायात्रा निकाली गई। मंडल प्रधानमंत्री महेश नीखरा, पंडित रमाकांत ने डोल को मंत्रोच्चारण के बीच उठाया। बारी-बारी से सभी भक्तों ने राधाजी के डोल को अपना अपना कंधा दिया। सभी भक्त ढोल ताशे की धुन पर नाचते गाते हुए चल रहे थे। शोभायात्रा का विराम श्री चक्रधर हाल में हुआ। इसके उपरांत पं. रमाकांत, मंडल अध्यक्ष कैलाश मित्तल, प्रधानमंत्री महेश नीखरा आदि ने राधाजी की आरती उतारी। मुख्य पुजारी ने राई नोन से लाडली राधाजी की नजर भी उतारी। इसके बाद भक्ता को प्रसादी वितरण किया गया।

बुढ़वा मंगल पर 51 हजार बार किया चौपाई का पाठः बुढ़वा मंगल पर संकट मोचन हनुमान (बालाजी) मंदिर में कई कार्यक्रम हुए। इसके तहत सुबह चरणसेवक जगवीर दास ने बालाजी सरकार का अभिषेक किया, फिर किष्किंधा कांड की चौपाई का 51 हजार बार पाठ किया गया। शाम को प्रभु बालाजी सरकार को मालपुआ और खीर का भोग लगाया गया। भाद्रपद के चौथे मंगलवार को बुढ़वा मंगल मानते हैं।

Posted By: vikash.pandey

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