ग्वालियर अंचल। Rain in Gwalior-Chambal region ग्वालियर-चंबल अंचल में पिछले 24 घंटो में रुक-रुक कर हो रही बारिश ने जहां फसलों को पानी की जरूरत पूरी कर दी है वहीं कहीं-कहीं ओलावृष्टि से किसानों की चिंता भी बढ़ी है। फिलहाल कृषि विशेषज्ञ इस बारिश को गेहूं, मटर और चने की फसल के लिए फायदेमंद बता रहे हैं। यदि पाले की आशंका बढ़ती है किसानों को खेत के आसपास धुआं करने की सलाह दी गई है।

भिंड में बुधवार-गुरुवार को पिछले 24 घंटे में 25 एमएम बारिश दर्ज की गई है। यहां दबोह में सुबह 5 बजे हल्के ओले गिरे। गुरुवार को दिन में कई बार कभी रिमझिम तो कभी तेज बारिश हुई। कृषि विस्तार अधिकारी पीएस राजपूत के अनुसार मावठ की इस बारिश से गेंहू,मटर,चना, और सरसों की फसल को लाभ होगा। सहायक संचालक कृषि विभाग रामसुजान शर्मा के अनुसार बारिश के पानी में नाइट्रोजन धुला होता है, जिससे खेतों में नइट्रोजन की मात्रा पहुंचने के कारण खाद भी कम मात्रा में देनी पड़ेगी।

मुरैना अंचल के पोरसा में कच्ची पाटौर यानि दीवार ढह गई, जिससे एक वृद्ध की मौत हो गई। अंचल में पोरसा के शिकहरा, नगरा व कीचोल पंचायतों के गांवों में ओलावृष्टि हुई। ओलावृष्टि से यहां सरसों व गेहूं की फसल में 30 से 40 फीसदी का नुकसान होना बताया जा रहा है। इसी तरह सिकरवारी में नहर की पट्टी के ल्होरीपुरा, देवगढ़, सरसेनी आदि क्षेत्रों में ओलावृष्टि हुई। बुधवार व गुरुवार को मिलाकर पूरे अंचल में 40 मिमी बारिश हुई।

दतिया में पिछले 24 घंटों में कुल 42 एमएम बारिश दर्ज की गई। सेंवढ़ा तहसील के सेंथरी, दिगुंवा, चीना, रायपुरा, बुजुर्ग, मुरली, भोवई, सिलोचनपुरा सहित कुछ अन्य गांवों चने के आकार के ओले गिरे है। किसानों का कहना है कि अब अगर इससे अधिक बारिश होती है तो फसलों को नुकसान भी हो सकता है।

शिवपुरी में पिछले 24 घंटे में 55 मिमी बारिश दर्ज की गई है। कुछ स्थानों पर कुछ देर चने के आकार के ओले भी गिरे। हालाकि यहां कम समय ओला वृष्टि होने से फिलहाल फसलों को ज्यादा नुकसान नहीं हुआ है।

टीकमगढ़ में गुरुवार को दोपहर करीब 12 बजे भी हल्की बूंदाबांदी हुई। इससे ठंड का असर अच्छा खासा रहा। गुरूवार को भी आसमान में बादल छाए रहने से दोपहर के समय कोहरे की चादर दिखाई दी।

प्रशासन ने जारी की एडवाइजरी जारी

श्योपुर में कृषि विभाग के उपसंचालक पी गुजरे द्वारा जारी सलाह में कहा है कि किसान अपने खेतों में हल्की सिंचाई करें एवं रात में 12 से 2 बजे के बीच मेढ़ों पर कचरे को जलाकर धुआं करें तथा फसलों पर सल्फर का 0.1 प्रतिशत घोल बनाकर फसल पर छिड़काव करें। इससे फसलों पर पाला का प्रभाव कम हो जाता है।

Posted By: Hemant Upadhyay

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Ram Mandir Bhumi Pujan
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