Rain wreaks havoc in Gwalior Chambal region: ग्वालियर, नईदुनिया प्रतिनिधि। रविवार-सोमवार को हुई बेमौसम बारिश ने किसानों को भारी नुकसान पहुंचाया है। खेतों में पककर खड़ी धान की फसल बिछ गई तो कटा हुआ बाजरा बारिश में भीग गया। पहले बाढ़ और अब बेमौसम बारिश से किसान बड़े संकट में है। ग्वालियर-चंबल के कुछ जिलों में किसानों को हुए नुकसान का आकलन करने के लिए प्रशासन टीमें रवाना कर दी हैं। कुछ जिलों में पटवारी बुधवार काे रवाना होंगे। नईदुनिया ने प्रशासन और कृषि विज्ञानियों से लक्ष्य और खेतों की वर्तमान स्थिति को देखकर नुकसान का आकलन कराया। निष्कर्ष में पाया कि ग्वालियर में धान और सरसों को 278 करोड़, भिंड में अकेली सरसों में 202 करोड़, मुरैना में सरसों को 97.5 करोड़, श्योपुर में दो करोड़ और दतिया में सात से 10 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है।

किस जिले में कितने नुकसान का अनुमान

जिला धान सरसों अनुमानित नुकसान

ग्वालियर 95 हजार हेक्टे 38 हजार हेक्टे 278 करोड

भिंड 10-15 फीसद 1.35 लाख हेक्टे 202.5 करोड़

श्याेपुर 38 हजार हेक्टे 5 हजार हेक्टे 2 करोड़ (धान)

मुरैना 1.8 लाख हेक्टे 97.5 करोड़

दतिया 52.50 हजार हेक्टे 150 हेक्टे 7-10 करोड़

टोटल 1.85 लाख हेक्टे 2.86 लाख हेक्टे 590 करोड़

धान-सरसों की फसल की लागत 12 से15 हजार रुपये प्रति हेक्टेयरः कृषि विज्ञानियों के अनुसार धान और सरसों की फसल रोपने में प्रति हेक्टेयर 12 से 15 हजार रुपये की लागत लगी है। सरसों की फसल के लिए किसान ने एक बीघा में 1300 रुपये का डीएपी खाद, 900 रुपये का बीज, जुताई व बुवाई में 1500 रुपये का डीजल, 300 रुपये की दवाइयां डाली है। वहीं धान की एक बीघा फसल पर किसान का करीब साढ़े नौ हजार रुपये खर्च हुआ है। इसमें धराई, डीजल, खाद, दवाइयों पर दो-दो हजार रुपये खर्च हुए हैं।

Posted By: vikash.pandey

NaiDunia Local
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