Raksha Bandhan 2020 : ग्वालियर। नईदुनिया प्रतिनिधि। कोरोना वायरस व गलवान घाटी विवाद के चलते भारतवासियों का चीन पर गुस्सा बरकरार है। आक्रोश का असर त्योहारों पर भी दिखाई दे रहा है। बीते साल तक जहां रक्षाबंधन पर बाजार चायनीज राखियों व खिलौनों से पटे रहते थे। वहीं इस बार बाजार से चायनीज राखियां गायब हैं। हाथ से बनी स्वदेशी राखियों को महिलाएं पसंद कर रही हैं। क्योंकि यह अपेक्षाकृत अधिक आकर्षक व मजबूत हैं।

खास बात यह है कि चायनीज राखियां बाजार में न होने के बाद भी स्वदेशी राखियों के दामों में इजाफा नहीं हुआ है। 5 रुपये से लेकर 250 रुपये तक की राखियां बाजार में उपलब्ध हैं। हालांकि इस बार कोरोना वायरस के कारण परिवहन खासा प्रभावित है। इसलिए आगरा, दिल्ली व इंदौर से 10-20 हजार रुपये की राखियां लाने वाले छोटे व्यापारी बहुत कम माल ला सके हैं।

बाजार में चायनीज प्रोडक्ट की डिमांड घटने के कारण व्यापारी भी चीनी खिलौने नहीं मंगा रहे हैं। व्यापारियों का कहना है कि उनके पास पिछले साल की राखियां व स्टॉक में चीनी खिलौने रखे हुए हैं, उन्हीं की बिक्री नहीं हो पा रही है। चीनी खिलौने यूं भी महंगे हो गए हैं, इसलिए व्यापारी भी नया माल नहीं खरीद रहे हैं। बच्चों के लिए बिकती थीं चायनीज राखियां।

गौरतलब है कि सबसे अधिक चायनीज राखियां बच्चों की जिद को पूरा करने के लिए बिकती थीं। रंग बिरंगे खिलौने व लाइट वाली चायनीज राखियां बच्चों को बांधने के लिए बाजारों में सजती थीं, लेकिन इस बार ऐसी राखियां बाजार में दिखाई नहीं दे रही हैं। इसके बजाय छोटा भीम समेत अन्य कार्टून छपी राखियां बच्चों को रास आ रही है। इन राखियों के दाम भी 20 से 100 रुपये तक ही हैं, जो चायनीज राखियों के बराबर ही हैं।

हर किसी को संक्रमण का डर, लेकिन बाजारों में नहीं भीड़ नियंत्रण : कोरोना संक्रमितों के आंकड़े शहर में लगातार बढ़ रहे हैं। मंगलवार को भी शहर में 79 कोरोना संक्रमितों की पुष्टि हुई। ऐसे में व्यापारियों के साथ ही कुछ हद तक आम जन भी कोरोना संक्रमण को लेकर भयभीत हैं। बावजूद इसके शहर के बाजारों में भीड़ बिल्कुल भी नियंत्रित नहीं हो पा रही है। बुधवार को भी दौलतगंज, नया बाजार, सुभाष मार्केट, नजरबाग मार्केट समेत बाड़ा स्थित व शहर के सभी प्रमुख बाजारों में खासी भीड़ रही। शारीरिक दूरी का बिल्कुल भी पालन नहीं हो रहा था।

इनका कहना है

ग्राहक बिल्कुल भी चायनीज राखियां व खिलौने नहीं खरीदना चाहता। इसलिए अहमदाबाद, कोलकाता व राजकोट की राखियां ही बेच रहे हैं। दिल्ली, आगरा, इंदौर आदि शहरों से छोटे दुकानदार 10-20 हजार रुपये की राखियां लाते थे, जो इस बार परिवहन की व्यवस्था न होने के कारण नहीं ला सके। ऐसे में बड़े व्यापारियों के पास जो पुराना स्टॉक था वह खप गया है। कीमतों में बढ़ोत्तरी नहीं हुई है।

मोहन खंडेलवाल, व्यापारी, पं.गुलाब मार्केट माधौगंज

-चायनीज गिफ्ट आयटम व खिलौने पुराने स्टॉक में है। वहीं माल नहीं बिक पा रहा है। नया माल नहीं मंगा रहे हैं, क्योंकि चायनीज प्रोडक्ट की डिमांड कम है, वह मिल भी नहीं रहा और महंगा भी हो गया है। अब तक रक्षाबंधन पर चीनी खिलौने व राखियां अधिक बिकती थीं, लेकिन अब स्वदेशी खिलौने आने लगे हैं, जिन्हें ग्राहक पसंद भी कर रहे हैं।

बलवीर सिंह खटीक, खिलौना व्यापारी, डीडी मॉल

Posted By: Nai Dunia News Network

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Raksha Bandhan 2020
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