Ram Mandir Bhoomi Pujan : ग्वालियर, नईदुनिया प्रतिनिधि। करीब 3 दशक से हिंदुओं की आस्था का केंद्र बिंदु रहा अयोध्या राम मंदिर का पुनः भूमिपूजन 5 अगस्त को होने जा रहा है। कोरोना वायरस के कारण भले ही इन ऐतिहासिक पलों को लाखों श्रद्धालु चाहते हुए भी प्रत्यक्ष अपनी आंखों से नहीं देख पाएंगे, लेकिन देश के कोने-कोने में राम मंदिर निर्माण के लिए उत्सव मनाया जाएगा। ग्वालियर में भी राम भक्त उस क्षण का इंतजार कर रहे हैं, जब मंदिर की आधारशिला रखी जाएगी। इस खुशी को साझा करने के लिए शहर के विभिन्न मंदिरों में सुबह से ही श्रीराम, जय राम, जय जय राम की संगीतमय धुन गूंजने लगेगी। वहीं शाम को मंदिरों में सैकड़ों दीये जलाए जाएंगे। साथ ही घर-घर में घी के दीये (दीपक) जलाए जाएंगे। अचलेश्वर मंदिर, राम जानकी मंदिर समेत शहर के तमाम मंदिरों में आकर्षक विद्युत सज्जा हो चुकी है।

अचलेश्वर मंदिर के पुजारी पं.गौरव शर्मा ने बताया कि मंदिर परिसर स्थित राम दरबार पर आकर्षक सजावट व लाइटिंग हो चुकी है। अयोध्या में राम मंदिर भूमिपूजन के उपलक्ष्य में बुधवार को पूरा मंदिर फूलों से सजाया जाएगा। मंदिर में 151 घी के दीये जलाए जाएंगे। राम धुन का आयोजन सुबह 11 बजे से देर रात तक जारी रहेगा। कोरोना के चलते मंदिर में शारीरिक दूरी का पालन कर मंडली के 5 लोग बैठेंगे, जिनके द्वारा संगीतमय रामधुन सुनाई जाएगी।

श्रीराम जानकी मंदिर, फालका बाजार लश्कर के ट्रस्टी सदस्य राजीव वैश्य ने कहा कि राम मंदिर भूमिपूजन के उपलक्ष्य में ग्वालियर में भी दीपक जलाकर उत्सव मनाया जाएगा। श्रद्धालुओं से अपील की गई है कि वे अपने घर पर ही दीपक जलाएं, क्योंकि कोरोना वायरस को देखते हुए श्रद्धालुओं का मंदिर में प्रवेश निषेध रहेगा। मंदिर पर आकर्षक विद्युत सज्जा की गई है। बुधवार को राम दरबार को फूलों से सजाया जाएगा एवं विशेष पूजा अर्चना होगी।

चंबल का पानी, पीतांबरा की पवित्र माटी होगी राम मंदिर में समाहित

मध्यप्रदेश के पूर्व उच्च शिक्षा मंत्री एवं बजरंग दल के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष जयभान सिंह पवैया द्वारा चंबल का पानी एवं पीतांबरा पीठ की पवित्र माटी अयोध्या पहुंचा दी गई है। मंगलवार को चंबल से लाए गए जल एवं पीतांबरा पीठ दतिया से लाई गई पवित्र माटी को मणिराम दास छावनी पहुंचकर श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र न्यास के अध्यक्ष महंत श्री नृत्यगोपाल दास महाराज को समर्पित किया गया। इस जल व माटी को राम मंदिर निर्माण में समाहित किया जाएगा। यह वही संतों की छावनी है जहां से 1990 की कारसेवा में कर्फ्यू के बीच अशोक सिंघल सहित हजारों कारसेवक तैयार हुए। यह स्थान अयोध्या राम मंदिर निर्माण आंदोलन का प्रमुख केंद्र रहा है।

Posted By: Nai Dunia News Network

नईदुनिया ई-पेपर पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करे

नईदुनिया ई-पेपर पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करे

डाउनलोड करें नईदुनिया ऐप | पाएं मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और देश-दुनिया की सभी खबरों के साथ नईदुनिया ई-पेपर,राशिफल और कई फायदेमंद सर्विसेस

डाउनलोड करें नईदुनिया ऐप | पाएं मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और देश-दुनिया की सभी खबरों के साथ नईदुनिया ई-पेपर,राशिफल और कई फायदेमंद सर्विसेस

ipl 2020
ipl 2020