- दस माह में एक को भी नहीं मिली मदद के बदले प्रोत्साहन राशि

Road safety campaign: ग्वालियर, नईदुनिया प्रतिनिधि। ग्वालियर-मुरैना रोड के पुरानी छावनी इलाके में एक माह पहले बाइक सवार दो युवकों को तेज रफ्तार ट्रक ने टक्कर मार दी। सड़क पर घायल तड़प रहे थे, लेकिन यहां से गुजर रहे लोग सड़क पर तड़प रहे युवकों को इंटरनेट मीडिया पर लाइव दिखा रहे थे। यहां से एक युवक गुजरा, जिसने तत्काल पुलिस और एंबुलेंस को सूचना दी। तब इन्हें अस्पताल पहुंचाया गया। यह पहली घटना नहीं है, ऐसे कई मामले सामने आ चुके हैं, जिसमें घायलों की मदद करने की जगह लोग फोटो खींचने और वीडियो बनाने में मशगूल दिखे। संवेदनहीनता का एक बड़ा उदाहरण है, यही वजह है- सड़क हादसे में घायल लोगों को गोल्डन आवर में अस्पताल तक न पहुंचाने के कारण इनकी मौत हो रही हैं।

सरकार भलें ही घायलों की मदद के लिए लाेगों को जागरुक करने के उद्देश्य से तमाम प्रयास करे, लेकिन आम लोग ऐसे समय एंबुलेंस और सूचना देने तक से पीछे हटते हैं। इसके पीछे वजह है- अभी भी लोगों को यही लगता है कि वह अगर सूचना देंगे तो उन्हें थाने और कोर्ट के चक्कर काटने होंगे। जबकि सड़क परिवहन मंत्रालय इसे लेकर बाकायदा निर्देश जारी कर चुका है, लेकिन इसका प्रचार-प्रसार न होने से लोग अभी भी ऐसे समय में भी मदद करने से पीछे हटते हैं।

सड़क हादसे में घायल की मदद करने वाले से पूछताछ तक न करने का नियम, 5 हजार रुपए का इनाम भी, ग्वालियर में एक को भी नहीं मिला:

- सड़क परिवहन मंत्रालय ने सड़क हादसों में घायलों को गोल्डन आवर में अस्पताल पहुंचाने के प्रति आम लोगों को जागरुक करने के उद्देश्य से नियम बनाए थे कि अगर सड़क हादसे में कोई व्यक्ति घायल व्यक्ति को अस्पताल पहुंचाता है तो उससे पुलिस पूछताछ तक न करे। यहां अगर वह व्यक्ति चाहता है तो उस व्यक्ति का नाम, पता, मोबाइल नंबर लिखा जा सकता है, साथ ही उसे प्रोत्साहन राशि वाली जानकारी भी देना है। लेकिन ग्वालियर में चौंकाने वाला तथ्य सामने आया, जनवरी से अक्टूबर माह के बीच एक भी व्यक्ति को प्रोत्साहन राशि नहीं दी गई। ऐसे व्यक्ति को जिम्मेदार नागरिक के रूप में प्रशस्ति पत्र देने का भी नियम है। जबकि ऐसे व्यक्ति को 5 हजार रुपए की राशि देने का नियम है। कई पुलिसकर्मियों तक को यह जानकारी नहीं है।

पुलिस का रवैया जिम्मेदार, इसलिए सूचना देने तक से बचते हैं लोग: ग्वालियर में जब कोई आम व्यक्ति 100 नंबर डायल कर किसी हादसे की सूचना देना चाहे तो पहले तो उसी व्यक्ति का नाम कंट्रोल रूम से संबंधित थाने के पुलिसकर्मियों को भेज दिया जाता है। पुलिसकर्मी उसी व्यक्ति से तमाम सवाल करते हैं, जिसके चलते लोग इससे बचते हैं। कई बार तो सूचना देने के बाद यदि घटनास्थल से चला जाए तो पुलिसकर्मी उसी से आरोपित की तरह व्यवहार करने लगते हैं। क्योंकि नए नियमों की जानकारी पुलिसकर्मियों तक को नहीं है।

सोलेशियम फंड...सड़क हादसे में मृत व्यक्ति के स्वजन और घायलों को आर्थिक मदद दिलाने में ग्वालियर पुलिस आगे:

- सोलेशियम फंड के तहत अज्ञात वाहन से सड़क हादसे में किसी व्यक्ति मौत होती है तो उसके स्वजनों को 25 हजार रुपए व घायल को 15 हजार रुपए की आर्थिक मदद पुलिस दिलाती है। यह राशि केंद्र सरकार द्वारा दी जाती है। ग्वालियर में वर्ष 2020 में 43 व 2021 में 44 प्रकरणों में आर्थिक मदद पुलिस ने दिलाई।

वर्जन:

अब नियम है कि हादसे की सूचना देने वाले से नाम, पता भी नहीं पूछा जा सकता। इस बारे में सभी थानों के स्टाफ को जागरुक करेंगे, जिससे लोग मदद के लिए आगे आएं। प्रोत्साहन राशि के बारे में प्रचार प्रसार करायेंगे।

नरेश अन्नोटिया, डीएसपी ट्रैफिक

Posted By: anil tomar

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