-ट्रैफिक विशेषज्ञों ने वीनस पब्लिक स्कूल के विद्यार्थियों को यातायात नियमों के प्रति किया जागरुक

Road safety campaignग्वालियर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। नईदुनिया द्वारा लगातार चलाए जा रहे सड़क सुरक्षा अभियान हर जान है जरूरी के अंतर्गत गुरुवार को ट्रैफिक विशेषज्ञों ने आनंद नगर स्थित वीनस पब्लिक स्कूल के विद्यार्थियों को यातायात नियमों के प्रति जागरुक किया। इस कार्यक्रम में ट्रैफिक विशेषज्ञों ने शार्ट फिल्मों के माध्यम से विद्यार्थियों को यातायात नियमों की जानकारी दी और कहा कि कई बार लोग नियमों का उल्लंघन करते हैं। ट्रैफिक पुलिस द्वारा पकड़े जाने पर वे ऊंची पहुंच का हवाला देकर सिफारिश के लिए फोन लगाते हैं, लेकिन वे इस बात को नहीं समझते हैं कि पुलिस ने उन्हें नियम तोड़ने पर पकड़ा है। ऊंची पहुंच भले ही उन्हें जुर्माने से बचा सकती हो, लेकिन ऊपर पहुंचने से नहीं बचा सकती है क्योंकि वे नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं। इस दौरान यदि कोई हादसा होता है, तो उन्हें अपनी जान से भी हाथ धोना पड़ सकता है।

इस कार्यक्रम में विशेषज्ञ के रूप में उपस्थित डीएसपी ट्रैफिक नरेश अन्नोटिया ने कहा कि यातायात नियमों के पालन का यह मतलब नहीं है कि आप दुर्घटना से सुरक्षित ही रहेंगे, बल्कि कोई भी हादसा होने पर आपको कम से कम नुकसान होगा। चार पहिया वाहन में बैठे हैं और सीट बेल्ट लगा रखी है, तो कोई हादसा होने पर एयरबैग खुल जाएंगे। इसके अलावा हादसे में लगने वाला झटके का असर भी कम हो जाएगा। इसी प्रकार दोपहिया वाहन पर यदि हेलमेट लगाए हैं, तो सिर सुरक्षित रहेगा। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल व्यक्ति को बचाने के लिए उसके स्वजन सब कुछ दांव पर लगा देते हैं। कई बार इलाज कराते-कराते संपत्ति तक गिरवी रखनी पड़ जाती है, जबकि छोटे-छोटे नियमों का पालन करने से इससे बचा जा सकता है। डीएसपी ट्रैफिक ने विद्यार्थियों से सवाल करते हुए पूछा कि कितने लोग स्कूल में अपने दोपहिया वाहनों से आते हैं। इसके जवाब में कुछ विद्यार्थियों ने हाथ खड़े किए। इस पर डीएसपी ट्रैफिक ने विद्यार्थियों से कहा कि यदि वे 16 वर्ष की आयु के हैं, तो वे बिना गियर की दोपहिया गाड़ी चला सकते हैं। वहीं गियर वाली गाड़ी चलाने के लिए 18 वर्ष की आयु होना अनिवार्य है। गाड़ी चलाने से पहले ड्राइविंग लाइसेंस अवश्य बनवाएं। उन्होंने विद्यार्थियों को शपथ भी दिलाई कि वे हमेशा यातायात के नियमों का पालन करेंगे और अन्य लोगों को भी इसके लिए जागरुक करेंगे।

-पीली बत्ती को लेकर हैं भ्रांतियां-

जागरुकता कार्यक्रम में ट्रैफिक विशेषज्ञ जितेंद्र शर्मा ने विद्यार्थियों को शार्ट फिल्म दिखाते हुए कहा कि ज्यादातर लोग फैशन के लिए तो ब्रांडेड चीजें खरीदते हैं, लेकिन दुर्घटना में सिर को सुरक्षित रखने वाले हेलमेट के लिए न तो ब्रांड का ख्याल रखते हैं और न ही गुणवत्ता का। हेलमेट सदैव आईएसआई मार्का और अच्छी गुणवत्ता का खरीदना चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों से पूछा कि ट्रैफिक सिग्नल पर तीन बत्तियां होती हैं। इनमें पीली बत्ती किसके बाद जलती है। ज्यादातर विद्यार्थियों ने जवाब दिया कि लाल बत्ती के बाद में पीली बत्ती जलती है। इस पर जितेंद्र शर्मा ने समझाया कि जब हरी बत्ती का समय खत्म होता है, तो चार से पांच सेकंड के लिए पीली बत्ती जलती है। यह वाहन चालकों को सावधान करने के लिए होती है कि वे अपने वाहन की गति धीमी कर लें, क्योंकि अब लाल बत्ती जलेगी और उन्हें रुकना पड़ेगा।

ये बताए ट्रैफिक के नियम-

-सड़क पर पैदल सदैव दाईं ओर ही चलें। इससे आप सामने से आने वाले वाहनों को देख सकेंगे।

-फुटपाथ पर सड़क के दोनों ओर चला जा सकता है, क्योंकि वाहन फुटपाथ से नीचे चलते हैं।

-यदि पेरेंट्स ट्रैफिक नियमों का पालन नहीं करते हैं, तो उन्हें रोकें-टोकें।

-आपके सामने यदि कोई दुर्घटना होती है, तो घायल की मदद करें।

-तत्काल 100 नंबर पर पुलिस और 108 नंबर पर एंबुलेंस को काल करें।

Posted By: anil tomar

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