ग्वालियर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। कोरोना की तीसरी लहर के दौरान ग्रामीण क्षेत्रों में अभी राहत की स्थिति है। शहरी इलाकों की अपेक्षा गांवों में कम मरीज निकल रहे हैं। इसके पीछे स्वास्थ्य विभाग के अफसरों का अनुमान है कि गांवों में घनी आबादी और भीड़भाड़ कम होने के कारण संक्रमण का उतना असर नहीं है। वहीं यह भी संभव है कि लक्षण दिखने पर मरीज भी सैंपल देने कम आ रहे हैं। इसको देखते हुए अब स्वास्थ्य विभाग के अफसर ग्रामीण क्षेत्रों में भी सैंपलिंग बढ़ाने जा रहे हैं। इसके लिए मोबाइल मेडिकल यूनिट (एमएमयू) का सहारा लिया जाएगा। अगले सप्ताह की शुरुआत से एमएमयू को ग्रामीण क्षेत्रों में भेजा जाएगा।

कोरोना की पिछली दो लहरों के दौरान देखने में आया है कि शहरी क्षेत्र में फैलने के बाद कोरोना संक्रमण ने गांवों में पैर पसारे थे। दूसरी लहर के दौरान ग्रामीण इलाकों पर खासा प्रभाव पड़ा था। हालांकि इस बार संक्रमण का गांवों में उतना असर नहीं है। फिर भी सावधानी बरतते हुए अफसर अब ग्रामीण क्षेत्रों में सैंपलों की संख्या में बढ़ोतरी करने जा रहे हैं। इसके लिए डबरा, भितरवार, घाटीगांव और मुरार ब्लाक के उन गांवों का पहले चयन किया जाएगा, जहां घनी आबादी और बाजार हैं। वहीं इंसीडेंट कमांडरों और जिला पंचायत के अफसरों से भी समन्वय स्थापित किया जा रहा है, ताकि ये पता चल सके कि किन गांवों में आबादी अधिक है। उन गांवों में प्राथमिकता के आधार पर एमएमयू भेजकर लक्षण वाले मरीजों के सैंपल इकट्ठे किए जाएंगे, क्योंकि पिछली लहर के दौरान भितरवार के ईंटमा गांव में ऐसे लक्षण वाले 300 मरीजों के सैंपलों में से 40 मरीज पाजिटिव आए थे।

वर्जन

ग्रामीण क्षेत्रों में अभी कोविड संक्रमण का असर कम है, लेकिन अब सावधानी बरतते हुए जिले के चारों ब्लाक के गांवों में एमएमयू भेजना शुरू की जाएंगी। इसके लिए ड्राइवर और स्टाफ की भी व्यवस्था लगभग हो गई है। हम इंसीडेंट कमांडर और जिला पंचायत अफसरों के भी लगातार संपर्क में हैं।

डा. अमित रघुवंशी, नोडल अधिकारी सैंपलिंग, स्वास्थ्य विभाग

Posted By: anil.tomar

NaiDunia Local
NaiDunia Local