- हाई कोर्ट का आदेश, याचिका की सुनवाई अप्रैल में होगी

ग्वालियर.नईदुनिया प्रतिनिधि। हाई कोर्ट की युगल पीठ में सोमवार को सम्राट मिहिर भोज की प्रतिमा विवाद पर सुनवाई हुई। कोर्ट ने संभागायुक्त की अध्यक्षता में बनी कमेटी की रिपोर्ट पेश करने के लिए तीन महीने का समय दे दिया है। कोर्ट ने बहस के दौरान नाम को लेकर दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं से कई सवाल भी किए। पूछा कि नाम पर विवाद क्यों होना चाहिए। जो नाम लिखा है, उसे लिखा रहने दिया जाए तो उसमें आपत्ति क्या है। वहीं दूसरी ओर क्षत्रिय महासभा की जनहित याचिका पर भी कोर्ट ने जवाब देने के लिए नगर निगम को समय दे दिया है।

ग्वालियर निवासी राहुल साहू ने सम्राट मिहिर भोज की प्रतिमा को लेकर उपजे विवाद को लेकर जनहित याचिका दायर की है। याचिकाकर्ता का कहना है कि दो समाजों के बीच प्रतिमा को लेकर विवाद हो रहा है। इससे शहर में ला एंड आर्डर की स्थिति बिगड़ रही है। इसके बाद कोर्ट ने 29 सितंबर 2021 को एक अंतरिम आदेश दिया था। संभागायुक्त की अध्यक्षता में एक कमेटी का गठन किया गया था। यह कमेटी सम्राट मिहिर भोज के संबंध में मौजूद शिलालेखों का अध्ययन कर रिपोर्ट तैयार कर रही है। जिन पक्षों को आपत्ति थी, उसको लेकर कोर्ट ने निर्देशित जो आपत्तियां है, उन्हें कमेटी के सामने रखा जाए। सोमवार को हुई सुनवाई को दौरान कोर्ट ने अतिरिक्त महाधिवक्ता से रिपोर्ट के संबंध में सवाल किया तो उन्होंने समय मांगा। कोर्ट ने तीन महीने का समय दे दिया।

क्षत्रिय महासभा का तर्क, चौराहों पर प्रतिमा लगाने का अधिकार नहीं

प्रतिमा विवाद को लेकर क्षत्रिण महासभा ने नई जनहित याचिका दायर की है। इस याचिका में सुप्रीम कोर्ट की एक गाइड लाइन का हवाला दिया गया है। वर्ष 2013 में सुप्रीम कोर्ट ने निर्देशित किया था कि किसी भी सार्वजनिक जगह पर प्रतिमा नहीं लगाई जाएगी। इसकी निगरानी की जिम्मेदारी हाई कोर्टों को दी गई थी। सड़क व चौराहों पर प्रतिमाएं नहीं लगाई जा सकती हैं। इसलिए प्रतिमा को हटाया जाए। इस मालमे में नगर निगम को जवाब पेश करना है।

Posted By: anil.tomar

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