ग्वालियर से रामेंद्र परिहार। Sarla Tripathi मन में जनसेवा की चाह हो तो उम्र कभी आड़े नहीं आती और यह बात 94 वर्षीय सरला त्रिपाठी पर एकदम सटीक बैठती है। गत 27 साल से वे रेलवे स्टेशन पर ट्रेनों में यात्रियों को ठंडा पानी पिला रही हैं। उम्र के इस पड़ाव पर सरला त्रिपाठी की लगन और जिजीविषा की तारीफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हाल ही में उनके कार्यक्रम 'मन की बात' में कर चुके हैं। दिन में आठ-आठ घंटे तक रेलवे स्टेशन पर सेवाभाव से जुटी रहने वाली सरलाजी को ऐसा करने से सुकून मिलता है। इतना ही नहीं जब भी उन्हें समय मिलता है, वे शिक्षा और स्वच्छता के लिए भी काम करती हैं। कई संस्थाओं के लिए मार्गदर्शक की भूमिका में रहती हैं।

शुरू से ही समाज सेवा में जुड़ी हैं सरला त्रिपाठी : ग्वालियर के गांधी नगर में रहने वालीं सरला त्रिपाठी के पति स्व. विष्णुवल्लभ त्रिपाठी एजी (एकाउंटेंट जनरल ऑफ इंडिया) ऑफिस के कर्मचारी थे। सरला त्रिपाठी शुरुआत से ही समाज सेवा से जुड़ी रहीं। ग्वालियर में उनकी चर्चा आम बात है लेकिन देश में उनके इस अनुकरणीय काम को पहचान हाल ही में दीपावली के दिन मिली, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 'मन की बात" में उनका जिक्र किया। उन्होंने उदाहरण देते हुए यह भी कहा कि मन में समाज सेवा का जज्बा हो तो 94 साल की उम्र भी छोटी नजर आती है। ग्वालियर में एक संस्था का मदर टेरेसा सम्मान भी सरला त्रिपाठी को मिल चुका है। पीएम से मिली तारीफ के बाद उनका उत्साह बढ़ा हुआ है।

इस तरह शुरू हुआ पानी पिलाने का अभियान : वर्ष 1993 की बात है। सरला त्रिपाठी एक सफर से लौटी थीं। गर्मी के दिनों में यात्रा के दौरान उन्होंने महसूस किया कि रेलवे स्टेशन पर पीने का पानी मिलना एक बड़ी समस्या थी। गर्मी में पानी की किल्लत रहती थी और ट्रेन छूटने के डर से यात्री नीचे उतर कर पानी भर भी नहीं पाते थे। उसके ठीक अगले दिन वे ग्वालियर रेलवे स्टेशन पहुंचीं। यहां पंजाबी परिषद के सदस्य पानी पिलाने की सेवा करते थे। सरला त्रिपाठी भी उसी दिन से परिषद के साथ जुड़कर पानी पिलाने लगीं। इन 27 सालों में परिषद के कई अध्यक्ष बदले, नए सदस्य आए और गए, लेकिन सरला त्रिपाठी वहीं हैं और निस्वार्थ सेवा कर रही हैं।

पीएम के मुंह से नाम सुन लगा 25 साल की हो गई

सरला त्रिपाठी कहती हैं- यात्रियों को उनकी सीट के पास पहुंचकर पानी पिलाने का सुकून अनूठा है। लगता है कि उनकी जिंदगी किसी के काम आ सकी। जब प्रधानमंत्री ने उनका नाम लिया तो मानो 94 साल की उम्र से वे वापस 25 वर्ष की हो गई। जज्बा दोगुना हो गया है। उनका एक और लक्ष्य यह है कि वे इस उम्र में मानसरोवर यात्रा करना चाहती हैं।

हमारी टीम का अहम हिस्सा हैं सरला त्रिपाठी। यात्रियों को पानी पिलाने का उनका जज्बा देखते ही बनता है। यही कारण है कि हमारी पूरी टीम एक तरफ और 94 साल की सरला त्रिपाठी एक तरफ हैं। वे हमारी सबसे युवा साथी हैं। - अशोक मारवाह, अध्यक्ष, पंजाबी परिषद, ग्वालियर

Posted By: Prashant Pandey