- लक्ष्मीनारायण, सर्वार्थ सिद्धि योग,अमृत सिद्धि योग में पितर लोक में गमन होगा पूर्वजों का

- खास रहेगी, सर्वपितृ अमावस्या तिथि

ग्वालियर. नईदुनिया प्रतिनिधि। इस बार की सर्वपितृ अमावस्या तिथि खास तिथि को पड़ रही है। इस बार अमावस्या को लक्ष्मीनारायण, सर्वार्थ सिद्ध् योग व अमृत योग एक साथ आ रहे हैं। ऐसे में पितृों का गमन पितरलोक में होगा। इस तरह का एक ही दिन में योग काफी लंबे अरसे के बाद पड़ रहा है। इसे शुभ भी माना जा रहा है। तीनों योग पितरों की शांति के लिए खास माने जा रहे हैं।

स्मृति संग्रह और श्राद्ध कल्प लता ग्रंथों में सर्वपितृ अमावस्या का विशेष महत्व बताया गया है। किसी कारण बस मृत परिजनों का उनकी मृत्यु तिथि पर श्राद्ध नहीं कर पाते हैं। तो इस सर्वपितृ अमावस्या तिथि पर पितरों के लिए श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान करने से पित्र पूरी तरह से प्रश्न होते हैं। इस दिन सूर्यऔर चंद्रमा एक ही राशि में होते हैं। यह दोनों ग्रह पितरों से संबंधित हैं। इस तिथि पर पित्र पुनः अपने पित्र लोक में अपने वंशजों को सुख समृद्धि का आशीर्वाद देकर चले जाते हैं।

बालाजी धाम काली माता मंदिर के ज्योतिषाचार्य डॉ. सतीश सोनी के अनुसार अमावस्या तिथि 25 सितंबर दिन रविवार को है। सर्वपितृ अमावस्या तिथि पर ग्रह, वार नक्षत्रों से मिलकर कुल सात शुभ योग का निर्माण हो रहा है। जिससे यह महापर्व बनेगा। इस शुभ योग में स्नान, दान, श्राद्ध करने से पितर साल भर के लिए संतुष्ट होकर पितर लोक में विदा होंगे। इस दिन उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र से मित्र नाम का शुभ योग पूरे दिन रहेगा। इसके अलावा शुभ और शुक्ल नाम के साथ सर्वार्थ सिद्धि योग और अमृत सिद्धि योग, वही सूर्य बुध की युति से बुध आदित्य योग और बुध और शुक्र की युति से लक्ष्मी नारायण योग बनेगा। इन शुभ योगों में किया गया। श्राद्ध, तर्पण, पूजापाठ से मिलने वाला पूर्ण फल पितरों को प्राप्त होगा। तथा यह सात शुभ योग इस तिथि की शुभता को भी बढ़ाएंगे।

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